पाकिस्तान की नादान जिद

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 समाप्त किए जाने के बाद पाकिस्तान सरकार कई नादानी भरे कदम उठा चुकी है। उन्हीं में से एक है भारत से उड़ान भरने वाले या भारत को जाने  वाले विमानों को अपने हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल न करने देना। भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज आइसलैंड, स्विट्जरलैंड और स्लोवेनिया की यात्रा पर जाने वाले हैं। इसके लिए  भारत सरकार ने पाकिस्तान से अपने हवाई मार्ग का इस्तेमाल करने की इजाजत मांगी थी। मगर वहां के विदेशमंत्री ने ट्वीट कर कहा कि प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत के किसी  भी विमान के लिए अपने हवाई क्षेत्र को न खोलने का आदेश दिया है। स्वाभाविक ही है कि इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने रोष प्रकट किया है। किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष के प्रति  दूसरे  देश का यह रवैया उचित नहीं कहा जा सकता। पाकिस्तान का भारत के नागरिक विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद करना तो समझा जा सकता है, पर यहां के  राष्ट्राध्यक्ष को भी इज्जत न देना उसका छोटापन ही कहा जाएगा। ऐसा करके उसे कुछ खास हासिल भी नहीं होगा, सिर्फ उसकी खुन्नस मिट सकती है। नागरिक विमानों के प्रवेश  पर प्रतिबंध लगने से उन्हें लंबी दूरी तय करके आना-जाना पड़ रहा है, जिससे उनका खर्च बढ़ जाता है। यह भारत को सबक सिखाने का एक हथकंडा कहा जा सकता है, पर राष्ट्रपति  के विमान के साथ ऐसा व्यवहार करके वह क्या जाहिर करना चाहता है। हालांकि यह पहला मौका नहीं है, जब पाकिस्तान ने भारत की तरफ जाने या वहां से दूसरे देशों के लिए  उड़ान भरने वाले नागरिक विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद किया है। पुलवामा की घटना के बाद भी जब भारत ने बालाकोट में हवाई हमला किया था, तब पाकिस्तान ने यही  किया था। पर करीब महीने भर बाद उसने कुछ विमानों को छोड़कर बाकी के लिए हवाई मार्ग खोल दिया था। फिर अनुच्छेद 370 हटने के बाद उसने सभी तरह के विमानों के लिए  अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है। हालांकि इस फैसले से उसे भी राजस्व घाटा उठाना पड़ रहा है, इसलिए यह उसकी नादानी ही कही जाएगी। मगर उसकी जिद है कि वह भारत को  सबक सिखाएगा, सो ऐसे नादानी भरे कदम वह लगातार उठा रहा है। कश्मीर मसले को वह नाहक तूल देता रहा है। कश्मीर शुरू से भारत का हिस्सा रहा है और वहां अनुच्छेद 370  किस तरह समाप्त करना है, यह भारत सरकार को सोचना था। सो, भारत सरकार ने उसका रास्ता निकाला। इस पर पाकिस्तान की तिलमिलाहट का कोई औचित्य नहीं। इसीलिए  विश्व बिरादरी में भी उसकी गुहार कोई नहीं सुन रहा है। इससे उसकी बौखलाहट और बढ़ती गई है। दोनों देशों के बीच तनाव भरे रिश्ते शुरू से रहे हैं। अनेक बार दोनों देशों ने एक- दूसरे से व्यापार, खेल वगैरह पर पाबंदियां लगाई हैं, लोगों की आवाजाही पर रोक लगाई है, मगर ऐसा शायद कभी नहीं हुआ कि किसी राष्ट्राध्यक्ष के साथ ऐसा सुलूक किया गया हो।  राष्ट्रपति के विमान से पाकिस्तान की सुरक्षा को भला क्या खतरा हो सकता है। उसका हवाई क्षेत्र न मिलने से बस इतना होगा कि उनके विमान को थोड़ा अधिक लंबा रास्ता तय  करना पड़ेगा। मगर पाकिस्तान ने अपनी नादानी के चलते एक बार फिर विश्व बिरादरी के सामने अपनी किरकिरी ही कराई है। अगर वह भारत की गुजारिश नहीं ठुकराता, तो उसका बड़प्पन ही जाहिर होता।

Post a Comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget