जम्मू-कश्मीर में कोई पाबंदी नही

नई दिल्ली
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि कश्मीर घाटी में अब कोई प्रतिबंध नहीं है और समूचे विश्व ने जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले भारतीय संविधान  के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने का समर्थन किया है। शाह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पांच अगस्त को लिए गए साहसिक कदम की वजह से  जम्मू-कश्मीर अगले 5-7 साल में देश का सबसे विकसित क्षेत्र होगा। गृह मंत्री ने घाटी में दुष्प्रचार फैलाने के लिए विपक्ष की आलोचना भी की। राष्ट्रीय सुरक्षा पर एक संगोष्ठी को  संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि प्रतिबंध कहा हैं? यह सिर्फ आपके दिमाग में है। कोई प्रतिबंध नहीं हैं। सिर्फ दुष्प्रचार किया जा रहा है। गृह मंत्री ने कहा कि कश्मीर में 196  थाना-क्षेत्रों में से हर जगह से कर्फ्यू हटा लिया गया है और सिर्फ आठ थाना-क्षेत्रों में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत पाबंदियां लगाई गई हैं। इस धारा के तहत पांच या इससे   ज्यादा लोग एक साथ इकठ्ठा नहीं हो सकते हैं।
उन्होंने हाल में संपन्न संरा महसभा का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी विश्व नेता (न्यूयार्क में) सात दिनों के लिए जमा हुए थे। किसी भी एक नेता ने (जम्मू- कश्मीर का) मुद्दा  नहीं उठाया। यह प्रधानमंत्री की बड़ी कूटनीतिक जीत है। शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में दशकों से आ रहे आतंकवाद ने 41,800 लोगों की जान ली है, लेकिन किसी ने भी जवानों, उनकी विधवाओं या उनके अनाथ बच्चों के मानवाधिकार का मुद्दा नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों से मोबाइल कनेक्शन नहीं चलने को लेकर लोग हल्ला कर रहे हैं। फोन की  कमी से मानवाधिकार उल्लंघन नहीं होता है। शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 10,000 नए लैंडलाइन कनेक्शन दिए गए हैं, जबकि बीते दो महीने में छह हजार पीसीओ दिए गए हैं।  उन्होंने कहा कि  अनुच्छेद 370 पर फैसला भारत की एकता और अखंडता को मजबूत करेगा। गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस)  के  एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया जहां उन्होंने कश्मीर के बारे में बातें की। अमित शाह ने कहा कि आज भी अनुच्छेद 370 को लेकर कई तरह की अफवाह और बातें हो रही हैं। ऐसा ही  कश्मीर को लेकर भी हो रहा है। इसलिए इस स्थिति को साफ करने की जरूरत है।
1947 से कश्मीर चर्चा और विवाद का विषय रहा उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि 1947 से कश्मीर चर्चा और विवाद का विषय रहा है। गलत इतिहास लोगों के सामने पेश किया  गया। अब कश्मीर पर नया इतिहास लिखने की जरूरत है।

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