'समुद्री सीमा पर आज भी हमले का खतरा'

मुंबई
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बार फिर पाकिस्तान पर करारा हमला बोला है। सिंह ने दो टूक कहा कि भारत को अस्थिर करने के लिए पाकिस्तान आतंकवाद का इस्तेमाल  करता  है। इस दौरान 26/11 हमले का भी राजनाथ सिंह ने जिक्र किया। उन्होंने साफ कहा कि हम 26/11 हमले को भूल नहीं सकते हैं अगर कोई चूक हुई थी तो उसे दोहराया नहीं जा सकता।
रक्षा मंत्री ने रविवार को आईएनएस विक्रमादित्य पर सुरक्षाकर्मियों के साथ योग किया। योग से पहले पत्रकारों से बातचीत में सिंह ने पाकिस्तान पर हमला बोला। इस दौरान उन्होंने  भारतीय नौ सेना की तारीफ भी की और कहा कि हर स्थिति से मुकाबले के लिए हमारे नेवी और कोस्ट गार्ड हमेशा अलर्ट पर रहते हैं। 1971 वाली गलती ना करे पाक इससे पहले   भी राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को चेतावनी भरे लहजे में आगाह किया था कि वह 1971 वाली गलती न करे। उन्होंने कहा था, मैं पाकिस्तान को बार-बार सुझाव दे चुका हूं कि वह  1965 और 1971 वाली गलती ना करे। 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के दो टुकड़े हो गए थे और बांग्लादेश के रूप में नया देश सामने आया था। इसलिए 1971 की गलती मत   दोहराना वरना पीओके का क्या होगा, अच्छी तरह समझ लेना।
पीओके के वजूद को हम स्वीकार नहीं करते इस दौरान राजनाथ सिंह ने यह भी कहा था कि भारत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के वजूद को स्वीकार नहीं करता है।   उन्होंने कहा था कि अगर पाकिस्तान के वजूद को हम स्वीकार करते हैं तो यह नहीं मान लिया जाना चाहिए कि पीओके के वजूद को भी हम स्वीकार करते हैं। हम उसके वजूद को   स्वीकार नहीं करते क्योंकि पाकिस्तान ने उस पर जबरन कब्जा कर रखा है।
पाक की संप्रुभता को कभी चुनौती नहीं दी बालाकोट हवाई हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा था कि भारत ने कभी पाकिस्तान की संप्रभुता को चुनौती नहीं दी। सीआरपीएफ  जवानों पर हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के आतंकवादियों ने आकर हमारे सीआरपीएफ के जवानों की हत्या की थी तो हमें आतंकवादियों के ठिकाने पर हमला करना ही था। 
2013 में आईएनएस विक्रमादित्य नाम के विमानवाहक पोत को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। आईएनएस विक्रमादित्य को देश की सुरक्षा में समर्पित किए जाने के साथ ही  समुद्र में देश की मारक क्षमता 500 किलोमीटर हो गई है।
अब भारत उन तीन चार देशों में शामिल हो गया है, जिसके पास इतने ज्यादा ताकतवर दो विमान वाहक यु्द्धपोत हैं। विक्रमादित्य का सौदा अटल बिहारी वाजपेई की एनडीए सरकार   के दौरान हुआ था। 

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