बोनस चाहिए तो पहले करें वेतन अनुबंध

बेस्ट प्रशासन का कर्मचारियों पर दबाव

मुंबई
बोनस चाहिए तो पहले वेतन अनुबंध पर हस्ताक्षर करें, इस तरह का दबाव कर्मचारियों पर बेस्ट की ओर से लाया जा रहा है। बेस्ट प्रशासन ने इस साल बेस्ट कर्मचारियों को 9  हजार 100 रुपए बोनस देने की घोषणा कर दी है। बेस्ट प्रशासन के इस निर्णय का कर्मचारियों में भारी असंतोष है। बेस्ट वर्कर यूनियन ने बेस्ट प्रशासन पर क्रिमिनल केस दर्ज  करने का निर्णय लिया है। उल्लेखनीय है कि बेस्ट कर्मचारियों का वेतन अनुबंध 2016 से अटका पडा है। बेस्ट के कर्मचारियों ने वेतन अनुबंध को लेकर मार्च महीने में हड़ताल की थी जो कि नौ दिन चली थी। राज्य सरकार ने जून महीने में बेस्ट कर्मचारियों का बीआईआर एक्ट रद्द कर दिया है, जिससे अब बेस्ट के निर्णयों पर मान्यता प्राप्त युनियन की अनुमति  लेना आवश्यक नहीं है। अब सभी यूनियन के कर्मचारियों को राजी होना जरूरी है। बेस्ट प्रशासन ने पिछले दिनों मनपा की सत्ताधारी शिवसेना की यूनियन से हाथ मिलाकर   कर्मचारियों का वेतन अनुबंध कर लिया। बेस्ट की वर्कर्स यूनियन को यह अनुबंध मान्य नहीं है, जिसके चलते युनियन ने नौ अक्टूबर से दोबारा हड़ताल करने की धमकी दी है। इस  बीच बेस्ट प्रशासन ने बेस्ट कर्मचारियों को अपनी ओर लुभाने के लिए 9 हजार 100 रुपए बोनस देने की घोषणा कर दी। बेस्ट प्रशासन ने अब एक नया फरमान जारी  किया है कि   बोनस उसी कर्मचारी को मिलेगा, जिसने वेतन अनुबंध पर हस्ताक्षर किया है।
बेस्ट प्रशासन के इस फरमान का बेस्ट वर्कर्स यूनियन ने नाराजगी जताई है और कहा है कि कर्मचारियों को ब्लैकमेल किया जा रहा है। बेस्ट वर्कर्स यूनियन के नेता शशांक राव ने  बेस्ट प्रशासन के इस तरह के फरमान के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि कर्मचारियों को दिया जाने वाला बोनस सानुग्रह अनुदान है।  यह सभी कर्मचारियों की उनके पिछले साल की कमाई होती है, जिसे कोई नहीं रोक सकता है।
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