पिता के कानून में फंसे फारुक

जम्मू/श्रीनगर
घाटी से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से राज्य की मुख्यधारा के नेता नजरबंद हैं। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की नजरबंदी को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ  है। फारूक अब्दुल्ला को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत में लिया गया है। इस कानून के तहत उन्हें दो साल तक बिना किसी सुनवाई के हिरासत में रखा   जा सकता है। नेशनल कांफ्रेंस के संरक्षक अब्दुल्ला उस समय से नजरबंद हैं, जब पांच अगस्त को केंद्र ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर उसे दो केंद्रशासित प्रदेश में बांट   दिया था। सूत्रों के अनुसार फारुक अब्दुल्ला की पार्टी उनकी गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। ज्ञात हो कि सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) कानून फारूख अब्दुल्ला के पिता शेख अब्दुल्ला ने अपने कार्यकाल में लागू किया था। फारूक अब्दुल्ला पर रविवार को यही सख्त कानून लगाया गया। उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और जम्मू कश्मीर प्रशासन को   पूर्व मुख्यमंत्री को एक अदालत के सामने पेश करने वाली याचिका पर जवाब देने को कहा। तमिलनाडु के एमडीएमके नेता वाइको की ओर से दायर याचिका में अब्दुल्ला को रिहा  करने की मांग की गई है, ताकि वह चेन्नई में एक कार्यक्रम में हिस्सा ले सकें। चार दशकों से वाइको अब्दुल्ला के करीबी दोस्त माने जाते हैं।

क्या है सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए)
सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत सुरक्षा कारणों को देखते हुए सरकार किसी भी व्यक्ति को दो साल तक नजरबंद कर सकती है। यह कानून साल 1978 में फारूक अब्दुल्ला के  पिता शेख अब्दुल्ला द्वारा घाटी में लागू किया गया था। उस दौरान शेख अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री थे।

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