राकांपा को एक और झटका

पूरे देश की राजनीति में अहम् नाम और मुकाम रखने वाले राकांपा सुप्रीमो शरद पवार की और उनकी पार्टी की सत्तस्याएं कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। अभी तक पार्टी  अपने नामचीन नेताओं की भगदड़ का ही सामना कर रही थी। अब उनके भतीजे सहित कई दिग्गज और वे स्वयं इडी की चपेट में हैं। उन पर मामला दर्ज हो गया है। यह ऐसा  मामला है, जो पिछले लंबे समय से सुर्खियां बनता रहा है, परंतु अब एफआईआर दर्ज होने के साथ ही यह तय हो गया है कि अब राकांपा सुप्रीमो सहित इन दिग्गजों को भी जांच  का सामना करना होगा। ऐसे समय जब विधानसभा चुनाव की दुंदुभी बज चुकी है, इसे राकांपा के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। यह पहले से ही डगमग चल रही राकांपा की  नाव को गहरे पानी में डुबो सकती है। कारण इस समय राज्य में उनकी पार्टी की जो स्थिति है, जिस तरह एक के बाद एक दिग्गजों ने पार्टी छोड़ी और बाकी कतार में बताए जा रहे  हैं, ऐसे में खोई हुई जमीन पर कुछ कर पाने की संभावना का सिर्फ पवार के कौशल से होने की उम्मीद उनके कार्यकर्ताओं को थी। अब जबकि खुद पवार पर मामला दर्ज है और  पूछताछ होने की संभावना है, इसमें व्यवधान खड़ा होने की पूरी संभावना है, जो चुनाव में राकांपा की हालत और खराब कर सकती है। वैसे हर सर्वेक्षण और राजनीतिक विश्लेषक इस चुनावी समर में कांग्रेस और राकांपा को कहीं नहीं देख रहे हैं, जबकि चारों ओर भाजपा की महायुती की लहर दिखाई दे रही है। ऐसे में यह झटका उसके अस्तित्व पर ही  सवाल  खड़ा कर सकता है, जो लोग अभी भी जाएं की न जाएं कि पशोपेश में थे, वह पुन: भाजपा या सेना का दामन थाम सकते हैं।

एक और बैंक पर प्रतिबंध

एक और बैंक पर प्रतिबंध लग गया है। पिछले दो-तीन दशकों में इस तरह और विशेषकर सहकारी बैंकों में ऐसा होना चिंता की बात है। कारण ऐसा होना जहां एक ओर बैंकों की  साख पर बट्टा लगाता है, वहीं दूसरी ओर खातेदारों का भी बड़ा नुकसान होता है। ऐसी घटनाएं अधिकांश सहकारी बैंकों में हो रही हैं। इससे साफ है कि वहां बैंकों के उन मापदंडों का  वैसा अनुपालन नहीं होता, जैसा इनके सुचारू और व्यवस्थित संचालन के लिए जरूरी है। हमारी केंद्र और राज्य सरकार तथा आरबीआई इसे लेकर काफी सतर्क है। पिछले दिनों के  बड़े सरकारी बैंकों के घपले-घोटालों ने उन्हें और सतर्क कर दिया है। कड़ी कार्रवाइयां भी हुई है और कठोर प्रावधान भी बनाए गए हैं। इन सबके बावजूद फिर ऐसा सामने आना यह  दर्शाता है कि अभी भी ऐसे लूप होल हैं, जिन पर पैबंद लगना जरूरी है, जिससे बैंकिंग व्यवस्था की साख और खातेदारों दोनों का पैसा सुरक्षित रहे। कारण इसमें तमाम लोग ऐसे हैं,  जो इन बैंकों में अपने जीवन भर की कमाई सुरक्षित रखते हैं। जब अचानक ऐसा होता है और उनका अपना पैसा निकालने पर ही प्रतिबंध लग जाता है या वे उसे गवां बैठते हैं, तो  उन पर क्या गुजरती होगी इसका सहज ही आकलन किया जा सकता है। संबंधित विभाग और नीति नियंता इस ओर ध्यान दें। उन कमियों को खोजें और उसका ऐसा सामयिक और  समुचित इलाज करें, जिससे किसी का कोई नुकसान न हो और न ही किसी की साख पर बट्टा लगे।

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