'सरकार के प्रोत्साहन से निर्यात तेज होने की उम्मीद'

नई दिल्ली
देश के निर्यातकों ने सरकार के निर्यात प्रोत्साहन के लिए उठाए गए कदमों को चुनौतीपूर्ण समय में प्रदान की गई बहुप्रतीक्षित राहत बताते हुए इनका स्वागत किया। भारतीय निर्यात  संगठनों के संघ (फियो) के अध्यक्ष शरद कुमार सर्राफ ने कहा कि जब वैश्विक व्यापार वृद्धि के नीचे जाने के आसार दिख रहे हैं, वैश्विक आर्थिक हालात चिंताजनक बने हुए हैं। ऐसे  में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की कर वापसी एवं प्रोत्साहन, निर्यात वित्तपोषण, निर्यात सुविधा और मुक्त व्यापार समझौतों इत्यादि के रूप में निर्यात क्षेत्र के लिए उठाए जाने   वाले कदमों की घोषणा एक बहुप्रतीक्षित राहत हैं। उन्होंने कहा कि इन कदमों से ना सिर्फ लघु अवधि में क्षेत्र की वृद्धि का दायरा बेहतर होगा बल्कि मध्यम और दीर्घावधि में भी यह  क्षेत्र को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे। यह पूरी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे। फियो ने कहा कि सरकार की वाणिज्यक वस्तुओं के निर्यात पर कर एवं शुल्कों में छूट  (आरओडीटीईपी) की नई योजना आकर्षक हैं क्योंकि इससे निर्यात उत्पादों पर लगने वाले सभी शुल्कों एवं करों के प्रभावों का शमन हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि अर्थव्यवस्था को  र तार देने के लिए सीतारमण ने शनिवार को आर्थिक सौगातों की तीसरी खेप की घोषणा की। इसमें निर्यात और रीयल इस्टेट क्षेत्र के लिए कई घोषणाएं की गईं हैं।
आरओडीटीईपी को एक जनवरी 2020 से लागू करने जा रही है। यह मौजूदा योजनाभारत से वाणिज्यिक वस्तुओं की निर्यात योजना (एमईआईएस) का स्थान लेगी। सरकार को  उम्मीद है कि नई योजना पुराने के मुकाबले अधिक कारगर तरीके से निर्यातकों को प्रोत्साहन प्रदान करेगी। इससे सरकारी खजाने पर 50,000 करोड़ रुपए तक बोझ पड़ने का  अनुमान है। एमईआईएस को हटाने के लिए लिए सरकार ने 31 दिसंबर तक का समय रखा है। इसी तरह का विचार कनेक्ट2इंडिया के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी पवन गुप्ता ने  भी रखा। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार के विस्तार में वर्तमान में दो बड़ी बाधाएं हैं। पहली बाधा कार्यशील पूंजी का सरल सुलभ ना होना और दूसरा देरी एवं अक्षमता। उन्होंने कहा  कि यह बेहतर है कि सरकार इन मुद्दों के समाधान पर ध्यान दे रही है। वहीं सर्राफ ने सरकार के माल एवं सेवाकर (जीएसटी) के तहत इनपुट क्रेडिट टैक्स (आईसीटी) की वापसी को  इसी माह के अंत तक पूर्णतया इलेक्ट्रॉनिक करने की घोषणा को भी निर्यातकों के लिए एक बड़ी राहत बताया। उन्होंने कहा कि इससे निर्यातकों का ना सिर्फ समय से और तेजी से   उनके जीएसटी का रिफंड मिल सकेगा। बल्कि यह उनके लंबे समय से बकाया आईसीटी की वापसी को भी तेज करने में मददगार होगा। फियो ने निर्यात ऋण बीमा योजना का दायरा  बढ़ाए जाने, ऋण आवंटन बेहतर करने और ऋण प्राथमिकता वाले क्षेत्रों (पीएसएल) के लिए ऋण आवंटन संबंधी नियमों को संशोधित कर के उसका फायदा निर्यातकों को दिलाने जैसी  अन्य घोषणाओं का भी स्वागत किया। पीएसएल नियमों में संशोधन से निर्यातकों को 36,000 करोड़ रुपये से लेकर 68,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्त पोषण प्राप्त हो सकेगा।  चमड़ा निर्यात परिषद के चेयरमैन पनारुना अकील ने कहा कि इन कदमों से निर्यात तेज करने में मदद मिलेगी और चमड़ा निर्यात में वृद्धि के एक महत्वपूर्ण स्तर को प्राप्त कर  सकेंगे।
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