प्रयागराज के हजारों घरों में घुसा बाढ़ का पानी

प्रयागराज
प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों के लगातार बढ़ रहे जलस्तर से निचले इलाकों में आफत की बाढ़ आ गई है। हजारों घरों में पानी घुस जाने से लोग घरों में ताला बंद कर जरूरी सामानों के  साथ सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित हजारों लोग जहां अपना घर छोड़कर रिश्तेदारों और परिचितों के यहां शरण लेने को मजबूर हुए हैं, वहीं अब तक छह सौ से अधिक लोग  प्रशासन की ओर से बनाये गए बाढ़ शिविरों में शरण लिये हुए हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें बाढ़ में फंसे बच्चे, बूढ़े और महिलाओं को घरों से निकालकर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर
लगातार भेज रही हैं। सोमवार की शाम गंगा नदी का फाफामऊ में जलस्तर 84.44 और छतनाग में 83.70 मीटर रिकॉर्ड किया गया है। वहीं नैनी में यमुना नदी का जल स्तर 84.32 मीटर तक  पहुंच गया है। जलस्तर खतरे के निशान 84.734 मीटर के काफी करीब है। दोनों नदियों का जलस्तर 2 सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रब्तार से बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले एक सप्ताह नदी के किनारे  रहने वाले लोगों के लिए मुसीबत भरे होने वाले हैं। जिला प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों के लिए 31 बाढ़ शिविर खोले हैं। अब तक पांच बाढ़ शिविरों में 600 से अधिक लोग शरण लेने पहुंच चुके हैं,  बकि जलस्तर बढ़ने के बाद लगातार अशोक नगर नेवादा, राजापुर,बेली कछार, छोटा बघाड़ा, सलोरी इलाकों के बाढ़ प्रभावित बाढ़ शिविर में पहुंच रहे हैं। स्कूलों में बाढ़ शिविर बनाए जाने के  कारण डीएम भानु चंद्र गोस्वामी ने फिलहाल इन स्कूलों में तीन दिनों का अवकाश घोषित कर दिया है। जिला प्रशासन बाढ़ राहत शिविरों में लोगों के खाने-पीने के इंतजामके साथ ही उनके लिए  दवाइयों के प्रबंध की बात कही है।
हालांकि जब अशोक नगर में बनाये गए एक ऐसे ही बाढ़ शिविर का जायजा लिया गया, जहां 62 परिवारों के 285 लोग अपने सामानों और मवेशियों के साथ शरण लिए हुए हैं, तो हालात अच्छे  नहीं दिखे। लोगों ने यहां बदहाल व्यवस्था की बात कही। वहीं राहत शिविर में बदबू के कारण सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। इस संबंध में जब एडीएम वित्त एमपी सिंह ने कहा कि सफाई  व्यवस्था का जिख्मा नगर निगम को दिया गया है। बारिश थमने के बाद अब संक्रामक बीमारियों का खतरा काफी हद तक बढ़ गया है, जिसके चलते अस्पतालों में मौसमी बीमारियों के मरीजों
की भारी भीड़ उमड़ रही है।
इन दिनों सबसे ज्यादा मरीज वायरल बुखार, खांसी, और डायरिया के अस्पतालों में आ रहे हैं, जिससे अस्पताल कीओपीडी व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। वहीं वायरल  बुखार के मरीजों से  अस्पताल के बेड भी फुल चल रहे हैं। मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय की ओपीडी में हर दिन डेढ़ हजार से दो हजार मरीज आते थे। अब यहां मरीजों की संक्या 40 फीसदी बढ़ गई है।  अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक वीके सिंह के मुताबिक अस्पताल में अभी वायरल फीवर के साथ ही खांसी और डायरिया के मरीज आ रहे हैं। इसके अलावा मलेरिया और डेंगू के अभी एक  या दो मरीज ही रिपोर्ट हुए हैं। 156 बेड के अस्पताल में सभी बेड मरीजों से फुल चल रहे हैं।
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