सऊदी में तैनात होगी अमेरिकी सेना

US Army
तेहरान
सऊदी अरब के आयल फील्ड्स पर ड्रोन हमले के बाद से खाड़ी में तनाव बढ़ गया है। सऊदी ने इसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है, वहीं अमेरिका ने सऊदी के अनुरोध पर  वहां अपने सैनिकों की तैनाती को मंजूरी दे दी है। हालांकि अमेरिका के इस फैसले से ईरान भड़क गया है। उसने सैनिकों की तैनाती के कदम पर आगाह किया है कि अगर कोई हम  पर हमला करेगा तो वह मुख्य युद्धक्षेत्र बनेगा। बता दें कि पिछले सप्ताह दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको के ऑयलफील्ड पर हमला हुआ था जिसकी जिम्मेदारी यमन में  मौजूद हूती विद्रोहियों ने ली थी। हालांकि अमेरिका ने कहा कि हमले में इस्तेमाल क्रूज मिसाइल ईरान के थे और इसे 'ऐक्ट ऑफ वॉर' करार दिया था। रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने  बताया कि अमेरिकी ने सऊदी में सैनिकों की तैनाती के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिक रक्षात्मक रवैया अपनाएंगे और एयर व मिसाइल डिफेंस पर  नजर रखेंगे। ईरान बोला, किसी भी स्थिति के लिए तैयार उधर  , इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कमांडर मेजर जनरल हुसैन सलाम ने कहा कि ईरान किसी भी तरह की  स्थिति के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि जो भी अपने देश को युद्ध का क्षेत्र बनाना चाहता है, आगे बढ़ सकता है। हम किसी भी देश को हमारे क्षेत्र में युद्ध नहीं लड़ने देंगे। हमें उम्मीद है कि वे रणनीतिक  भूल नहीं करेंगे। तेहरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशन एंड होली डिफेंस क्यूजियम में एक प्रदर्शन के दौरान सलामी ने कहा कि ईरान ने एयर डिफेंस और ड्रोन बनाने में अमेरिका के  टे नॉलिजकल प्रभुत्व को समाप्त कर दिया है। सलामी ने कहा कि आपका ड्रोन हमारे इलाके में क्या कर रहा है? हम उन्हें मार गिराएंगे, हम उन सभी को मार गिराएंगे, जो हमारे  एयरस्पेस में अतिक्रमण करेगा। सलामी ने आगाह करते हुए कहा कि सीमित आक्रामकता हमेशा सीमित नहीं रहेगी, क्योंकि ईरान प्रतिक्रिया देने के लिए प्रतिबद्ध है और जब तक  आक्रामक लोग नष्ट नहीं हो जाते, यह चुप नहीं बैठेगा।

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