'लोगों की जिंदगी बचाना प्राथमिकता'

Nitin Gadkari
नई दिल्ली
केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने नए ट्रैफिक चालान नियमों पर कहा कि यह लोगों की जिंदगी बचाने के लिए की गई कोशिश है। राज्य सरकारों द्वारा जुर्माने की रकम कम  करने के फैसले पर उन्होंने कहा कि मैं इस पर यही कहना चाहता हूं कि जुर्माने से मिली रकम राज्य सरकारों को ही मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जुर्माना घटाने का   फैसला कर सकती है और यह उन पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि केंद्र का मकसद सड़क परिवहन को सुरक्षित बनाना है। गडकरी ने साथ ही जोड़ा कि अगर लोग नियमों का  पालन करेंगे, तो उन्हें जुर्माना भरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा का भारी-भरकम जुर्माने का मकसद जनहानि कम करना था। सड़क सफर को सुरक्षित करना उद्देश्य बता दें कि  गुजरात सरकार ने जुर्माने को कम करने का एलान किया है। कुछ अन्य सरकारें भी भविष्य में ऐसा एलान कर सकती हैं। गडकरी ने इस पर कहा कि भारत में हर साल सड़क  दुर्घटना में 1 लाख 50 हजार से अधिक लोगों की मौत होती है। उसमें से 65% लोगों की आयु 18 से 35 साल के बीच होती है। हर साल 2 से 3 लाख लोग सड़क दुर्घटना के कारण  दिव्यांग हो रहे हैं। हम युवाओं के जान की कीमत समझते हैं और उनके जीवन को सुरक्षित बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकारों द्वारा जुर्माने की रकम माफ करने के फैसले पर कहा कि प्रदेश की सरकारों को इसका अधिकार है। मैं बतौर मंत्री सिर्फ अपील ही कर सकता हूं कि  यह फाइन रेवेन्यू के लिए नहीं है, लोगों की जिंदगी बचाने के लिए है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि रोड हादसों के मामले में भारत का रेकॉर्ड विश्व में काफी खराब है। अगर लोग परिवहन नियमों का पालन करेंगे, तो उन्हें कोई रकम देने की जरूरत  नहीं है। 

भय और आदर के लिए जरूरी था भारी-भरकम जुर्माना 
बता दें कि 1 सितंबर से लागू मोटर वीइकल्स (अमेंडमेंट) एक्ट 2019 के बाद से पूरे देशभर से ट्रैफिक रूल तोड़ने वालों पर भारी-भरकर चालान की खबरें आ रही हैं। गडकरी ने कहा  कि सख्त कानून की जरूरत थी, क्योंकि लोग ट्रैफिक रूल को बेहद हल्के तौर पर लेते थे। उनके जेहन में कानून के प्रति न तो भय था और न आदर।

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