एक किशोरी का संदेश


एक लड़की बोलती है और पूरी दुनिया के राष्ट्रप्रमुख सुनते हैं और स्तब्ध रह जाते हैं। कारण वह जो कुछ बोलती है वह दिल से बोलती है, जिसमें उसका विश्वास, मान्यता और दर्द खुलकर  सामने आता है, जिसमें एक ललक है धराधाम और उसकी विविधता को अनंतकाल के लिए संजोने की। जिससे हम ही नहीं अनंतकाल तक आने वालीहमारी पीढ़ियां अमन चैन से रह सकें और  उन्हें शुद्ध हवा, पानी तथा वातावरण उपलब्ध हो। वह ऐसा इसलिए कर सकी कि उसने इसकी लड़ाई, संघर्ष अपने घर से शुरू किया। अपने जीवन में ऐसा रहन-सहन अपनाया, जो पर्यावरण के
अनुकूल हो। छोटी सी उम्र में यह बात दुनिया को अजूबा जरूर लग रही है, परंतु यह अजूबा नहीं है। होनहार पूत के पांव पालने में ही दिखते हैं यह कहावत काफी पुरानी है। हमारेयहां ही नहीं  दुनिया के इतिहास में भी ऐसे ताम उदाहरण हैं, जहां छोटी उम्र के लोगों ने कमाल किया और उनके कार्यों के लिए दुनिया उनको नमन करती है। जानकार और समझदार लोग पर्यावरण के  संतुलित संदोहन के खिलाफ दशकों से जन जागरण और आंदोलन कर रहे हैं। इससे कुछ हासिल नहीं हुआ यह नहीं कहा जा सकता। आज दुनिया के देशों का तिनिधित्व करने वाली संस्था में इस  पर चर्चा हो रही है। लोगों में जागरूकता बढ़ रही है, परंतु यह सब इतने धीमे गति से हो रहा है, जो सही नहीं है। कारण वातावरण में गर्मी में अत्यधिक गर्मी, ठंडी में अत्यधिक ठंडी, बारिश में  थोड़े ही समय में बेहिसाब बारिश रोजमर्रा की बात बन रही है। समुद्र का तल घट रहा है। जिस तरह की बाढ़ की विभीषिका दुनिया आजकल देख रही है यह खतरे की घंटी है। अब सिर्फ कोरमपूर्ति के लिए, कर्तव्य पूरा करने के लिए आवाज उठाने से काम नहीं चलेगा। हर उस व्यक्ति को संयुक्त राष्ट्र में दहाड़ने वाली उस किशोरी के तरह मिशनरी बनाना होगा, सिर्फ भाषण नहीं  देना होगा। उसकी तरह अपनी कार्यों से भी वही भावना दिखानी होगी और उन हर क्रिया-कलापों को, उत्पादों को नकारना होगा, उनका बहिष्कार करना होगा, छोड़ना होगा, जो इसे बढ़ाते हैं या जो  इसके लिए खतरा बनाए हुए हैं। यह समस्या या खतरा किसी व्यक्ति विशेष के या देश विशेष के लिए नहीं है। समग्र मानवता और उसका भविष्य इसकी चपेट में है। हर देश और दुनिया के हर व्यक्ति को इसकी गंभीरता समझनी होगी। उन हर कार्यों, उत्पादों का परित्याग करनाहोगा, जो इसे बढ़ा रहे है। इसके लिए विकसित राष्ट्र सबसेज्यादा जिम्मेदार हैं। कारण यह है कि उन्होंने ऐसे  क्रिया-कलापों की शुरुआत कर और स्वयं को विकसित बनाकर दुनिया के सामने एक ऐसा मॉडल पेश किया, जिसका अंधानुकरण दुनिया करती जा रही है, तो यदि बिगाड़ने के लिए जिम्मेदार वे  लोग हैं, तो बनाने की शुरुआत भी उसी तेजी के साथ उन्हें करनी चाहिए। बाकी सारे उनका अनुसरण करने लगेंगे और यही बात वह लड़की रेखांकित कर रही है।
अभी सभी राष्ट्र सतर्क हों और दुनिया के सभी नागरिक  सतर्क हों। ऐसा वह हर काम और ऐसे हर उत्पाद को बंद करें, जो पर्यावरण के प्रतिकूल हो और पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली को  प्राथमिकता दी जाएं। वह विकास विकास नहीं हो सकता, जो हर पल विनाश का कारण बन रहा हो और विराट जगत के हर तरह के प्राणियों के लिए वनस्पतियों के लिए और भावी पीढ़ी के लिए  तरा बन रहा हो, यही वह किशोरी कह रही है।

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