ईडी कार्यालय नही गये शरद पवार

Sharad Pawar
मुंबई
महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाला प्रकरण में राकांपा प्रमुख शरद पवार ने शुक्रवार दोपहर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कार्यालय जाने का कार्यक्रम रद्द कर दिया। पवार ने मीडिया  से बात करते हुए कहा कि कहा कि राज्य भर में कानून और व्यवस्था की स्थिति की देखते हुए उन्होंने ईडी कार्यालय जाने का निर्णय स्थगित कर दिया। पवार को समझाने के लिए  मुंबई पुलिस कमिश्नर संजय बर्वे खुद उनके आवास पर पहुंचे, जिसके बाद उन्होंने मीडिया के सामने आकर अपना फैसला बदलने का एलान किया। पवार ने कहा कि बारामती और  पुणे में हुई बारिश से बड़ा नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि वे बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात करेंगे। ईडी ने शरद पवार को ई-मेल भेजकर कहा था कि  उन्हें शुक्रवार को दफ्तर आने की कोई जरूरत नहीं है। उसे जब जरूरत महसूस होगी, तब वह उन्हें तलब करेगी। कानून और व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े, यह देखते हुए मुंबई पुलिस आयुक्त संजय बर्वे ने शरद पवार से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने पवार से ईडी कार्यालय नहीं जाने की अपील की। इसके बाद पवार ने ईडी कार्यालय जाने का कार्यक्रम स्थगित कर दिया। इधर राकांपा कार्यकर्ताओं की तरफ से मुंबई सहित राज्य में अलग-अलग जगहों पर आंदोलन किया। पवार ने कार्यकर्ताओं से ईडी कार्यालय परिसर में  नहीं आने का आव्हान किया था, इसके बावजूद भारी संख्या में कार्यकर्ता वहां पहुंचे थे और वे जोर-शोर से सरकार विरोधी नारे लगा रहे थे। राकांपा कार्यकर्ताओं ने ईडी की प्रेत यात्रा  भी निकाली। पुलिस ने शरद पवार के ईडी कार्यालय में हाजिर होने के कार्यक्रम को देखते हुए क्षेत्र में कड़ा पुलिस बंदोबस्त किया था। पुलिस ने कोलाबा, कफ परेड सहित सात थाना  क्षेत्रों में धारा 144 लागू दी थी। जगह-जगह पर ईडी कार्यालय जाने वाले रास्तों पर तैनात पुलिस लोगों की जांच कर रही थी। मुंबई पुलिस ने इस दौरान आधुनिक तकनीक का  उपयोग करते हुए ड्रोन की सहायता से भीड़ पर नजर रखने का काम किया।

सहानुभूति पाने के लिए राकांपा का इवेंट : पाटिल
वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत दादा पाटिल ने कहा कि ईडी ने केवल गुनाह दाखिल किया, इस पर सहानुभूति हासिल करने के लिए राकांपा ने यह इवेंट आयोजित किया था। पुणे  में पाटिल ने शरद पवार का नाम न लेते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पवार पर गुनाह दाखिल करने में केंद्र और राज्य सरकार का कोई संबंध नहीं है। उनके समक्ष कोर्ट  जाने का मार्ग खुला है। पाटिल ने राकांपा पर निशाना साधते हुए कहा था कि कुछ साल पहले राकांपा के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल को गिरफ्तार किया गया था, उस वक्त याद नहीं  आता कि उनके समर्थन में कोई आगे आया था। इसके अलावा उन्होंने बताया कि शरद पवार की सलाह पर चल रही कांग्रेस नीत सरकार ने करीब एक दशक पहले महाराष्ट्र राज्य  सहकारी बैंक (एमएससीबी) में घोटाले की जांच की पहली बार शुरुआत की थी। राज्य के वरिष्ठ मंत्री पाटिल ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के उन आरोपों से इंकार किया कि राजनीतिक  प्रतिशोध के तहत शरद पवार सहित इसके शीर्ष नेताओं का नाम इसमें घसीटा गया है। उन्होंने यहां कहा कि मामला 2010 का है जब शरद पवार की सलाह पर चलने वाली कांग्रेस-  राकांपा सरकार सत्ता में थी। पाटिल ने कहा कि जब तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को कुछ गलत होने का संदेह हुआ तो उन्होंने समिति बनाकर  जांच शुरू कराई। उन्होंने  कहा कि तब भारतीय रिजर्व बैंक ने सहकारिता बैंक के लिए एक प्रशासक की नियुक्ति की।
पाटिल ने कहा कि इसके बाद कुछ लोगों ने यह कहते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया कि उचित जांच नहीं हुई। अदालत के निर्देश पर हाल में प्राथमिकी दर्ज की गई। उन्होंने पूछा कि इसलिए यह सवाल कहां उठता है कि राज्य सरकार बदले की भावना से काम कर रही है। पाटिल ने कहा कि 'स्वायत्तशासी एजेंसी'प्रवर्तन निदेशालय ने खुद ही  मामला दर्ज किया, क्योंकि 100 करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला हुआ। ईडी ने हाल में खुलासा किया था कि शरद पवार का नाम मामले में सामने आया।

युति का निर्णय अंतिम दौर में
पाटिल ने कहा कि गुरुवार को नई दिल्ली में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में युति पर विस्तार पूवर्क चर्चा हुई और युति का निर्णय अंतिम   दौर में है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ दिनों में युति का निर्णय घोषित किया जाएगा।
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