चोटिल दीपक फाइनल फाइट से हटे, मिला रजत पदक

Dipak Puniya
नई दिल्ली
युवा भारतीय पहलवान दीपक पुनिया के वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने की उम्मीदों को झटका लगा है। 86 किग्रा वेट कैटिगरी के फाइनल में पहुंचे थे और उन्हें  खिताबी मुकाबले में रविवार को ईरान के ओलंपिक चैंपियन हसन यजदानी के खिलाफ खेलना था, लेकिन उन्होंने इस मैच में नहीं उतरने का फैसला किया है। उन्हें टूर्नामेंट के पहले  ही दौर के बाउट में बाएं पैर में चोट लगी थी।
उसमें अब सूजन बढ़ गई है और वह वजन नहीं संभाल पा रहा है। इस तरह 20 साल के भारतीय खिलाड़ी को अपनी पहली सीनियर विश्व चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल से संतोष  करना पड़ा। उन्होंने खुद इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट के पहले बाउट में ही मुझे चोट लग गई थी। अब भी मेरे बाएं पैर में सूजन है। मैं देश के लिए गोल्ड  मेडल जीतना चाहता, लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हो सका। मुझे लगा था कि खिताबी बाउट से पहले मैं ठीक हो जाऊंगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। रेसलर दीपक चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाले भारत के सबसे युवा पहलवान हैं। 20 वर्षीय इस पहलवान ने कहा कि चोट खिलाड़ी के जीवन का हिस्सा होता है। ओलंपिक कोटा हासिल करना मेरे लिए  गौरव की बात है। इसके लिए मैं उत्साहित भी हूं और वादा करता हूं कि मैं देश को निराश नहीं करूंगा। 2016 में वर्ल्ड कैडेट का खिताब जीतने वाले रेसलर दीपक पुनिया कुछ दिनों  पहले ही जूनियर वर्ल्ड चैंपियन में गोल्ड जीत चुके हैं। रविवार को उनके पास इस साल गोल्डन डबल करने का शानदार मौका था। दीपक ने 86 किग्रा कैटिगरी के सेमीफाइनल में  पहुंचने के साथ ही ओलंपिक कोटा भी हासिल कर लिया। वह ओलंपिक के लिए क्वॉलीफाई करने वाले चौथे भारतीय रेसलर हैं।

नंबर्स गेम
4 मेडल अब तक भारत पक्का कर चुका है, जो चैंपियनशिप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। 2013 में भारत ने तीन मेडल जीते थे।
1 गोल्ड चैंपियनिशप में अब तक भारत को मिला है, जो 2010 में सुशील कुमार ने जीता था।
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