घरेलू उपचार ही लाभकारी है जुकाम में

जुकाम को एक संक्रामक रोग माना जाता है। जो इस रोग से पीड़ित होते हैं उन्हें छूने या उनके संसर्ग में आने तक से जुकाम हो सकता है। रोगी द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली  वस्तुओं का इस्तेमाल करने या वायुमंडल में व्याप्त इसके रोग के रोगाणुओं में तेजी से विकसित होने की क्षमता होती है।
प्राय: यह माना जाता है कि ऋतु परिवर्तन के समय जुकाम की समस्या अधिक देखी जाती है। यह सिर्फ शीत ऋतु में ही नहीं बल्कि भयंकर गर्मी में भी संक्रमित होने वाली एक  ऐसी साम्यवादी बीमारी है, जो अमीर-गरीब, छोटे-बड़े, स्त्री-पुरुष, महल-झोपड़ी आदि में कोई भेदभाव नहीं करती।
ऋतु-परिवर्तन का संधिकाल जुकाम के रोगाणुओं के पनपने का सबसे अधिक व उपयुक्त समय माना जाता है। इस संधिकाल में सतर्कता बरतने से ही जुकाम की समस्याओं से बचा  जा सकता है। आज तक इसकी कोई रामबाण औषधि नहीं खोजी जा सकी है जबकि चेचक, प्लेग, कैंसर, एड्स, पीलिया आदि अनेक खतरनाक बीमारियों से बचाव के लिए औषधियां  प्राप्त की जा चुकी हैं और जो बाकी हैं, उनकी औषधियों की खोज की जा रही है। मामूली समझा जाने वाला जुकाम अभी चिकित्सा विज्ञान की पकड़ से कोसों दूर ही है। जुकाम के  अन्य कारणों में एलर्जी भी हुआ करती हैं। एलर्जी साधारण सर्दी- जुकाम से भिन्न होती है। इसमें मरीज को अचानक निरंतर छींकें आने लगती हैं और नाक से पानी जैसा द्रव्य बहने  लगता है। एलर्जी के उत्पन्न होने के प्रमुख स्रोत वस्तुओं में धूल, धुआं व छींक, आदि को माना जाता है। अक्सर जुकाम हर बार एक ही प्रकार के रोगाणु द्वारा नहीं होता। इसका  संक्रमण होते ही सिर भारी हो जाता है, छींकें आने लगती हैं, आंखें जलने लगती हैं, नाक बहने लगता है और किसी काम में मन नहीं लगता। यहां तक कि जुकाम हो जाने पर लेटे  रहना तक मुश्किल हो जाता है।
प्राय: लोग जुकाम होते ही औषधियों को लेना प्रारंभ कर दिया करते हैं जो उचित नहीं है। अधिकांश मामलों में जुकाम का उपचार शरीर की सुरक्षा-प्रणाली स्वयं ही कर लिया करती  है। एक सप्ताह में जुकाम स्वयंमेव ठीक हो जाता है। मांसपेशियों की अकड़न, गले की खराश दूर करने तथा बंद नाक को खोलने के लिए गर्म दूध में अदरक मिलाकर पीना बहुत  फायदेमंद माना जाता है। दिन में तीन-चार बार तक उबले हुए गर्म पानी में नमक डाल कर गरारा करने से, दूध में काली मिर्च तथा मिश्री मिलाकर पीते रहने से, शहद के साथ  अदरक पीसकर खाने से तथा अजवायन का काढ़ा पीते रहने से जुकाम में फायदा पहुंचता है। जुकाम की अवस्था में अधिकाधिक समय आराम करना हितकर होता है। जुकाम के  रोगियों को अपने वस्त्र, तौलिया, रूमाल आदि को अलग रखना चाहिए अन्यथा पूरे परिवार को जुकाम हो सकता है।

- पूनम दिनकर

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