'आरबीआई पूरी तरह से स्वायत्त लेकिन सबसे बढ़ कर होती है सरकार'

मुंबई
रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने जोर देते हुए कहा कि आरबीआई पूर्ण रूप से स्वायत्त है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक सरकार के साथ निष्पक्ष और पूरी तरह  खुलकर विचारविमर्श करता है। निर्णय लेने के मामले में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है। दास ने एक कार्यक्रम में कहा कि सभी देशों में सरकार और मौद्रिक प्राधिकरण के  विचारों में भिन्नता होती है। हालांकि, विचारों की भिन्नता को लेकर विचार-विमर्श करना और उसे सुलझाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मैं आपको बताना चाहता हूं कि आरबीआई और  सरकार के बीच काफी बातचीत होती है, लेकिन जहां तक किसी मुद्दे पर निर्णय लेने या अंतिम फैसला लेने का संबंध है तो मैं आपको पूरे विश्वास के साथ बताना चाहता हूं कि यह  काम आरबीआई करता है। आरबीआई फैसले लेने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र है। गवर्नर ने कहा कि विचारों का आदान-प्रदान और एक-दूसरे को अपने पक्ष से रू -ब-रू करवाना जरूरी है क्योंकि इससे सौहदर्य पूर्ण और अच्छे संबंध बनते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि सरकार के साथ विचार - विमर्श को बंद नहीं किया जा सकता है, क्योंकि सरकार सर्वोच्च   शासक (सबसे ऊपर) है और आरबीआई उस शासन का हिस्सा है। दास ने हैरानी जताते हुए कहा कि केंद्रीय बैंक किसी के जयकारे (चीयरलीडर) लगाने वाला नहीं है लेकिन जो लोग  यह कहते हैं कि आरबीआई को सरकार के लिए जयजयकार

करने वाला नहीं होना चाहिए, उनसे मेरा एक सवाल है
क्या आप यह उम्मीद करते हैं कि आरबीआई अर्थव्यवस्था पर सरकार की खुलेआम आलोचना करेगा?' उन्होंने स्पष्ट किया कि कई मुद्दों पर सरकार और आरबीआई के बीच मतभेद   होंगे लेकिन हम बातचीत करते हैं और यह विचार-विमर्श आंतरिक होता है।
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