रेल मंत्री ने कहा, 'यही मुंबई है'

मुंबई
मानसून में मुंबईवासियों को होने वाली परेशानियों से सिर्फ एक बार दो-चार होने के बाद ही रेल मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि ऐसे हालात 'जलवायु परिवर्तन से पैदा  चुनौतियां हैं।' मूसलाधार बारिश और ऊंची लहरों के कारण पैदा हुई परेशानियों को नियंत्रण से बाहर बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 'यही मुंबई है।' इन्हीं कारणों से वह अपने  कार्यक्रम में काफी देरी से पहुंचे। मुंबई मेट्रो के लिए आरे कालोनी में करीब 2,700 पेड़ों को काटने के महाराष्ट्र सरकार के विवादित फैसले का जिक्र किए बगैर उन्होंने कहा कि  आधुनिक अवसंरचना वक्त की जरूरत है। इस साल मानसून में मूसलाधार बारिश के कारण भारत की आर्थिक राजधानी कई बार बेबस होकर थम सी गई, खास तौर से ट्रैक पर पानी  भरने के कारण मुंबई की जीवनरे खा मानी जाने वाली लोकल ट्रेनों का संचालन बंद हो गया। इंडो अमेरिकन चेंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से आयोजित कार्यक्रम में देरी से पहुंचे  गोयल ने कहा कि पूरी रात हुई बारिश के कारण उन्हें हवाईअड्डे से कार्यक्रम स्थल के बीच की 25 किलोमीटर की दूरी तय करने में दो घंटे का वक्त लग गया। उन्होंने कहा, मैं सोच  सकता हूं  कि लोगों को कितनी दिक्कत आती होगी। मुंबई यही है। जब इतनी ऊंची लहरें उठ रही हों और मूसलाधार बारिश हो रही हो तो दुनिया में कहीं भी इस हालात से निपटा  नहीं जा सकता है। गोयल ने कहा, यह जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियां हैं और पूरी दुनिया साथ मिलकर उन आपदाओं से निपटने का तरीका खोज रही है जिनका कुछ साल  पहले तक अस्तित्व भी नहीं था।

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