पाक वैश्विक आतंकवाद का सरगना

दुनीया के सामने भारत ने पाकिस्तान को किया बेनकाब


जिनीवा
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर को लेकर पेश किए गए झूठ के पुलिंदे पर भारत ने मंगलवार को करारा जवाब दिया। भारत ने  पाकिस्तान समेत दुनिया को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का आतंरिक मामला है और झूठ की ऐसी कहानी वैश्विक आतंकवाद के केंद्र (पाकिस्तान) से आती है।  भारत की तरफ से विदेश मंत्रालय की सचिव विजय ठाकुर सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि कश्मीर में धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं। विदेश मंत्रालय की सचिव के साथ पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त के तौर पर काम कर चुके अजय बिसारिया भी मौजूद थे। इससे पहले पाकिस्तान ने 115 पेज के झूठ के पुलिंदे के साथ यूएनएचआरसी में कश्मीर  की स्थिति को लेकर भारत पर कई आरोप लगाए। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भारत पर कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया था।
विदेश मंत्रालय की सचिव ने कहा कि हमारा संविधान किसी भी व्यक्ति से भेदभाव किए बिना सभी नागरिकों को बराबर सम्मान देता है। हमारी स्वतंत्र न्यायपालिका, फ्री मीडिया  और हमारा समाज मानवाधिकारों की रक्षा करता है। हमारे हाल के कदम (अनुच्छेद 370) से जम्मू-कश्मीर के लोगों को प्रत्येक नागरिक की तरह समान अधिकार मिलेंगे। इस कदम  से लिंगभेद समाप्त होगा। बाल अधिकारों को बल मिलेगा।
उन्होंने कहा कि दुनिया जानती है कि झूठ की यह कहानी वैश्विक आतंकवाद के केंद्र से आती है, जहां आतंक को आश्रय दिया जाता है। हम इस बात को फिर से दोहराना चाहते हैं  कि संसद द्वारा पारित अन्य विधानों की तरह यह संप्रभु निर्णय पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। 370 के बारे में दुनिया को बताया सच जम्मू-कश्मीर के मामले पर   जवाब देते हुए विजय ठाकुर सिंह ने कहा कि भारत ने हाल ही में अपने संविधान के मुताबिक कुछ अहम कदम उठाए हैं, जो जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के नागरिकों को आगे   बढ़ने में अहम साबित होंगे। इसके परिणामस्वरूप वहां संपत्ति के अधिकार और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधित्व सहित लिंग भेदभाव को खत्म करने में मदद मिलेगी। शिक्षा, सूचना   का और काम करने का अधिकार मिलेगा। शरणार्थियों और विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों के खिलाफ लंबे समय से चला आ रहा भेदभाव खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ये सभी फैसले  पूरी बहस के बाद हमारी संसद ने लिए हैं।
यह बहस पूरे देश ने देखी और उसका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि हम पूरी तरह फिर से साफ कर देना चाहते हैं कि भारत की संसद द्वारा लिए इस फैसले की तरह अन्य सभी  फैसले पूरी तरह हमारा आंतरिक मामला है। कोई भी देश अपने आंतरिक मामलों में दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं कर सकता, भारत तो बिल्कुल नहीं।

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