लौट के बुद्धू घर को आए

अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से बौखलाए पाकिस्तान के निजाम को अब, जबकि उसकी सारी गीदड़भभकी नाकाम हो गई है और इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का उसका  प्रयास न सिर्फ औंधे मुंह गिर गया। उल्टा कई बड़े देश उसे ही इस मुद्दे को द्विपक्षीय बताकर और भारत का आंतरिक मुद्दा बताकर पाक को ही नसीहत देते नजर आए। जिस तरह  से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा समित में कोई भी देश उनकी हां में हां मिलाता नजर नहीं आया और किसी भी मुस्लिम राष्ट्र ने भी पाक को कोई तवज्जो नहीं दी, उससे लगता है कि पाक  को अपनी औकात पता लग रही है। आतंक और सहयोग दोनों साथ नहीं मिलता। अंत में पाक ने वह किया, जो किनारे लगने पर कमजोर आदमी करता है। संयुक्त राष्ट्र को ही  मुस्लिम विरोधी करार देने लगे। यही नहीं ताबड़तोड़ हमारे साथ रेल सेवाएं, व्यापार सब बंद कर दिया, अब जबकि सब कुछ कर लिया और चिल्ला लिया और दूसरों की बात छोड़िए  उनके ही नेता उन्हें नाकाम कहने लगे, तो अब पाक को सद्बुद्धि आती दिख रही है और वह उक्त चीजें बंद कर अपने ही पैर काटने का जो उपक्रम कर चुका है, उससे निकलने के  लिए कुलबुला रहा है। अब वह हमसे बात करने की भी इच्छा जता रहा है। दवाओं की आयात को इजाजत दे रहा है। कुलभूषण जाधव को राजनयिकों से मिलने की  इजाजत दे रहा  है। करतारपुर कॉरिडोर पर बात कर रहा है। कुल मिलाकर अब उसे अपनी दुरावस्था का भान हो रहा है कि उसने आतंक के कारोबार से जो दुनिया को काबू करने का प्रयास किया।  हमें पराभूत करने का जो खेल खेला वह कितना भोथरा है और वह कैसे उसके गले की फांस बन रहा है। अब उसे बस इतनी दयानतदारी दिखाना चाहिए और हमारा कश्मीरउस  इलाके को भी छोड़ देना चाहिए, जो उसने जबरन कब्जा किया है और जिसे पीओके कहते है। कारण वह हमारा है और अपनी ताकत समय श्रम और धन जो वह आतंकवाद को  पनपाने में खर्चा करता है। उसका उपयोग उस अवाम का दर्द करने में लगाए, जो रोटी-कपड़ा और दवा जैसी छोटी-मोटी चीजों की लिए तरस रही है।

बंद हो ऐसे गोरखधंधे

स्कूली बच्चों को मध्यान्ह भोजन देना हमारे देश की ऐसी योजना है जिसे यदि सही ढंग से लागू किया जाय, तो इससे बच्चों को और विशेषकर, अभावग्रस्त तबके के बच्चों को काफी  लाभ होगा। कारण सरकारी स्कूलों में उनकी ही संख्या ज्यादा होती है। रसूखदार परिवारों के बच्चे तो अंग्रेजी माध्यम की टीपटॉप स्कूलों में पढ़ते हैं ऐसा पाया गया कि भोजन, वर्दी   और किताबों की नि:शुल्क व्यवस्था ने ऐसे वर्ग के उन बच्चों के लिए भी स्कूल का द्वार खोला है, जो उक्त वस्तुओं के अभाव में विद्यालय आने से परहेज करते थे, परंतु जिस  तरह से समय-समय कई राज्यों में गड़बड़ी की शिकायतें आम हो रही हैं। कहीं नमक-रोटी दी जा रही है, तो कहीं मेनू का सही अनुपालन नहीं हो रहा है। ऐसी चरमराई व्यवस्था पर  तुरंत रोक लगनी चाहिए और संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। कारण छात्रों को सरकार ने अपनी योजना में संतुलित स्वादिष्ट और स्वास्थ्यप्रद भोजन की व्यवस्था  कीहै, जिससे छात्र को वह सब तत्व मिल सकें। जिसकी उसे जरूरत है यदि कोई उस पर गड़बड़ घोटाला कर रहा है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है। जिम्मेदार अधिकारियों को   औचक निरीक्षण और अन्य तरीकों से यह सुनिश्चित कराना होगा कि यह व्यवस्था तय, मान दंडों के अनुसार हो और उसके आड़ में होने वाले गोरख धंधे बंद हों और उन्हें गुणवत्ता  वाले अच्छे भोजन मेनू के अनुरूप मिले।

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