पाक खुद कर रहा है अपनी फजीहत

पाक ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की अपनी जमीन पर मेजबानी की और उन्हें कश्मीर पर अपने सुर में सुर मिलाने का प्रयास किया, जो औंधे मुंह गिर पड़ा। कारण  दुनिया जानती है कि हकीकत क्या है। जम्मू- कश्मीर हमारा अभिन्न अंग है और पाक उसके एक हिस्से पर नाजायज काबिज है। हमारी यहां की अल्पसंख्यक आŽबादी वैसी ही मुफीद  है और सुरक्षित है जैसी कि बहुसंख्यक हिंदू आबादी। यही नहीं यूएई के विदेश मंत्री ने इस मसले पर मुस्लिमों को ना घसीटने की भी पाक को नासीहत दी। कम से कम इसके बाद  तो पाक की आंखे खुलनी चाहिए। अब इस मुद्दे पर 'मान न मान मैं तेरा मेहमान' वाली नीति छोड़कर सही राह पर आना चाहिए। कारण आज जिस भारत से उसका मुकाबला है, वह  उसकी नादानियां तथा काली करतूतें झेलकर इस तरह आजिज है कि अब वह उसकी किसी भी नादानी को झेलने को तैयार नहीं है। इसका इशारा उरी और पुलवामा के बाद सर्जिकल  स्ट्राइक से दिया जा चुका है। अब सिर्फ एक ही मार्ग है कि वह हमारा कश्मीर का वह हिस्सा छोड़ दे, जिस पर वह नाजायज काबिज है। वह आतंक की दुकान बंद कर अमन और  शांति की उस राह पर चले, जिसपर चलकर उसकी जनता का आज जो जीवन दूभर है, कल सुनहरा हो सकता है। उसने कश्मीर पर जी भर कर चिल्ला लिया है। इसको हर नकारात्मक रंग देने का उसका प्रयास नाकाम हो रहा है, जो उसकी बौखलाहट और पागलपन बढ़ रहा है। इसके चलते जिस तरह की हरकत वह सीमा पार सैनिक इकठ्ठा कर या आतंकवादियों को भेजने का प्रयास कर कर रहा है, उससे उसकी ही हालत और खराब होने वाली है या उसका अस्तित्व भी खतरे में आ सकता है। कारण आज उसके साथ कोई नहीं   है। ना कोई मुस्लिम राष्ट्र ना दुनिया का कोई और राष्ट्र। पूरी दुनिया आतंक का खात्मा चाहती है। कारण आतंकवाद ने कमोबेश सŽाको परेशान किया है। उसका खात्मा तभी होगा,   जब आतंक का मक्का बन चुका पाक अपने यहां चलते हर आतंक के कारखाने बंद करेगा और उसमें कार्यरत हैवानों और उनके मार्गदर्शकों और योजनाकारों को कटघरे में खड़ा कर  उनको पापों का जिम्मेदार बनाएगा। पाक यह नहीं कर रहा है। अपनी धरती पर सिसकती जनता के आंसू नहीं देख रहा है। बलूचिस्तान में उसके लोगों पर जो कहर टूट रहा है वह  नहीं देख रहा। उसको कश्मीरियों की चिंता है, जो आज जैसे भी अवस्था हैं, उसका सबसे बड़ा जिम्मेदार वही है, जो आज खुली किताब की तरह दुनिया के   सामने है। यह हमारे  प्रयासों का प्रतिफल है। मोदी युग में कूटनीतिक कौशल का कमाल है। हमारी सेना का कमाल तो पाक अपने जन्म से लेकर घुसपैठ से लेकर बालाकोट तक कई बार देख चुका है।  इस बार उसे देखने को मजबूर न करे वरना उसका क्या अंजाम होगा वह सोच भी नहीं सकता। उसके निजाम को चाहिए की अपनी रियाया पर रहम करे, जो उसकी नादानियों का   अंजाम भुगत रही है और छोटी-छोटी चीजों के लिए तरस रही है। दुनिया एक्कीसवीं सदी में दौड़ लगा रही है और पाक का सबसे बड़ा निर्यात गधे और कुत्ते हैं। इसी से उसे अपनी  औकात का पता चल जाना चाहिए। नकल करके वो कभी भारत नहीं बन सकता। हम चांद पर जा रहे हैं पाक को असलियत में कम से कम अब तो इसका भान होना चाहिए, जबकि  उसका मुस्लिम कार्ड भी औंधे मुंह गिर गया है, वह दुनिया भर में अपनी और फजीहत क्योंकि करा रहा है।

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