विनाश और विकास में से एक को चुने पाक

’पर उपदेश कुशल बहुतेरे' हमारे यहां प्रचलित यह कहावत हमारे पड़ोसी और चिर शत्रु पाकिस्तान पर पूरी तरह लागू होती है। वह गला फाड़-फाड़ कर चिल्ला रहा है कि कश्मीर में  जुल्म हो रहा है। कर्फ्यू लगा है, परंतु वह न हमें दिख रहा है और न दुनिया को, जबकि पाकिस्तान में जो हो रहा है वह हम ही नहीं दुनिया देख रही है और सुन रही है। वहां अल्प संख्यकों की बात कौन करे मुस्लिन सुरक्षित नहीं हैं। रोज पीओके और बलूचिस्तान से मदद की गुहार लग रही हैं और यह अत्याचार कोई और नहीं पाक का निजाम और उसकी सेना  कर रही है। वहां अल्प संख्यकों के बारे में जो हो रहा है उसके बारे में जितना भी बताया जाय कम है, अभी सिख लड़की से जबरिया शादी की बात समाने आई थी। अब एक हिंदू  लड़की ने छात्रावास में अपनी जान गवां दी है। सूचना है कि वह हत्या है। उपद्रव उत्पीड़न जबर्दश्ती निकाह, धर्म परिवर्तन और न जाने क्या-क्या जुल्म रोज पाक में सुर्खियां बन रहे  हैं, जबकि हमारे देश में खुद अल्पसंख्यक यह कह रहे हैं कि वे उसी तरह जीवन यापन कर रहे हैं जैसे कोई और भारतीय नागरिक। शायद यही वह कारण है कि आतंक के सौदागर  कोई समर्थक दुनिया में नहीं मिल रहे हैं और यहां तक चीन भी उसके कुकर्मों में उसका भागीदार बनने को तैयार नहीं है। चीन पाक कॉरीडोर में उलझे होने के बाद भी जिस तरह  पाक दुनिया में बदनाम है और जिस तरह वह हम पर हवाई आरोप कर अपनी छवि सुधारना चाह रहा है वह एकदम उलटा पड़ रहा है। देश हो या व्यक्ति उसको अपने कुकर्मों का  फल भोगना ही पड़ता है। पाक आतंक का आश्रय लेकर इतना खून-खराबा करवा चुका है, निर्दोषों को इतना निशाना बनवा चुका है कि अब उसे उसका हिसाब देना ही है और इस राह  को छोड़ने की बजाय वह इसे सही साबित करने के लिए जायज ठहराने के लिए जो उछलकूद कर रहा है वह उसकी स्थिति को और खराब कर रहा है। उसके द्वारा अकारण सीज  फायर का उल्लंघन आतंकियों की घुसपैठ कराने का तरीका है। यह हम ही नहीं दुनिया भी अच्छी तरह से जान चुकी है। आतंकी कारोबार ने उसकी छवि खराब कर दी है, उसकी  अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है। उसकी हालत ऐसी कर दी है कि कटोरा लेकर दौड़ने पर भी कोई नहीं पूछ रहा है रियाया तिलतिल कर जी रही है। उसे महंगाई और  अत्याचार दोनों मार रहे हैं। इसके बाद भी अपना रास्ता न सुधारने की हठधर्मिता इमरान खान और पाक की सेना और उनकी खुफिया एजेंसी दिखा रही है और बड़ी तेजी से उस राह   पर जा रही है, जहां से हर रास्ता सिर्फ और सिर्फ बर्बादी की ओर जाता है। हमने बड़े धैर्य से उनमें सद्बुद्धि का संचार होने का इंतजार किया, परंतु उसका जवाब उन्होंने हमेशा धोखे   से मक्कारी से दिया। अब जबकि हमने उनको उनकी ही भाषा में परंतु जिम्मेदारी के साथ जवाब देना शुरू किया है तो वे भयभीत है, परंतु अपनी कुटिलता नहीं छोड़ रहे हैं और न  ही धोखेबाजी और चुपके से धात करने की शैली बदला रहा है और झूठ पर झूठ बोल रहे हैं इससे न किसी देश का भला हुआ है और न उनका होगा। इसका एहसास उन्हें अब तक  हो जाना चाहिए। पुन: जिस तरह के बोल पाक का निजाम बोल रहा है और जैसे अत्याचारों की कहानी उसका निजाम अपनी ही रियाया पर करके दुनिया की सुर्खियां बनवा रहा है  और जिस तरह उसका कट्टरपंथी तबका अल्पसंख्यकों का जीना हराम कर रहा है वह दिन दूर नहीं। जब वह उसे ही ले बीतेगा। इसलिए पाक सारी नापाक हरकतें बंद कर और अपना  नाजायज कब्जा पीओके का छोड़कर अपने घर की खबर ले। अपनी रियाया की खबर ले, वरना विनाश तो उसके द्वार पर दस्तक दे ही रहा है। अब उसे तय करना है कि वह विकास  कहता है या विनाश।

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