शरद पवार के अपमान से व्यथित होकर दिया इस्तीफा : अजित पवार

Ajit Pawar
मुंबई
राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजित पवार ने कहा कि राज्य सहकारी बैंक घोटाले में राकांपा अध्यक्ष शरद पवार का किसी भी प्रकार का संबंध नहीं होने के बावजूद नाहक ही  उनका नाम जोड़ा गया। मेरे बैंक के संचालक मंडल में शामिल होने से शरद पवार का नाम आया। उन्हें मेरे वजह से अपमान सहना पड़ा, यह देखकर मैं परेशान हो गया और इसी  वजह से व्यथित होकर मैंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान में पत्रकारों से बातचीत में अजित पवार ने कहा कि इस्तीफा देने के बाद शनिवार को जब  मेरी शरद पवार से मुलाकात हुई तो मैं उनसे नजरें नहीं मिला सका। उन्होंने कहा कि मेरे परिवार में कोई विवाद नहीं है। परिवार के लिए पवार के शब्द अंतिम होते हैं। इस दौरान  अजित भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए। अजित पवार ने कहा कि हम इंसान हैं, हमारी भी भावनाएं हैं। मैं शुक्रवार को शरद पवार के साथ मौजूद नहीं था। मैं अपने  क्षेत्र में था, वहां बाढ़ आई थी। इस्तीफे के समय में काफी दुखी था, कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं, कार्यकर्ता व सहयोगी से कैसे बात करूं। इसके बाद ही मैंने अपना फोन  बंद कर दिया था।अजित पवार ने कहा कि मैंने बिना किसी से पूछे इस्तीफा दिया। मैंने पार्टी के कार्यकर्ताओं, नेताओं को आहत किया, इसलिए मैं उनसे माफी मांगता हूं

बैँक घोटाले के आरोप बेबुनियाद
सरकारी बैंक घोटाले के आरोपों को बेबुनियाद बताते अजित पवार ने कहा कि सहकारी बैंक की कुल पूंजी 10 हजार करोड़ की है, तो 25 हजार करोड़ का घोटाला कैसे हो सकता है।  आज भी ये बैंक 285 करोड़ के लाभ में हैं। उन्होंने कहा कि हम सब महाराष्ट्र सहकारी बैंक में संचालक थे, जहां हम निर्विरोध जीते थे, सभी पार्टियों के लोग उसमें शामिल थे। इस मामले में मैंने सभागृह में सभी जवाब दिए थे। सदन में कहा गया कि 1088 करोड़ का घोटाला हुआ है, बाद में एक पीआईएल में कहा गया कि 25 हजार करोड़ का घोटाला है। बैंक  में केवल 11 हजार करोड़ की ही सेविंग है, उसमें 25 हजार करोड़ का घोटाला होता तो क्या बैंक को अब पता चलता?
इसके पहले राकांपा प्रमुख शरद पवार ने पारिवारिक मतभेद की अटकलों को खारिज कर दिया। अजित ने शनिवार को मुंबई में अपने चाचा शरद पवार से उनके आवास पर मुलाकात  की।
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