FATF से ब्लैकलिस्ट होगा पाक!

नई दिल्ली
पाकिस्तान पर आतंकी ढांचा और टेरर फंडिंग पर लगाम लगाने में नाकामी की वजह से फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) से ब्लैकलिस्ट होने की तलवार लटक रही है। टेरर फंडिंग के खिलाफ निगरानी करने वाले सूत्रों के मुताबिक इस्लामाबाद ब्लैकलिस्ट होने के करीब पहुंच गया है। सूत्रों ने बताया कि टेरर फंडिंग के खिलाफ पाकिस्तान को एफएटीएफ  की तरफ से जो 27 पॉइंट वाला लक्ष्य दिया गया था, वह उनमें से सिर्फ 6 को ही हासिल कर पाया है। बता दें कि अगर पाकिस्तान एफएटीएफ से ब्लैकलिस्ट होता है, तो उसके लिए  अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय मदद की राह तकरीब बंद हो जाएगी। पाकिस्तान फिलहाल एफएटीएफ की 'ग्रे लिस्ट' यानी निगरानी वाले देशों की सूची में शामिल है। अगले महीने पैरिस में  एफएटीएफ उसके दर्जे की अंतिम समीक्षा करेगा। दरअसल, एफएटीएफ का उद्देश्य मनी लांड्रिंग, टेरर फंडिंग सहित इंटरनेशनल फाइनैंशल सिस्टम के लिए गंभीर खतरों को खत्म   करने के लिए कानूनी, नियंत्रणकारी और व्यावहारिक कदमों के कारगर पालन को सुनिश्चित करना है।
एफएटीएफ के ऐक्शन प्लान के पाकिस्तान में क्रियान्यवयन की निगरानी करने वाले सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान ने अपनी सरजमीं पर मौजूद संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित 100 से  ज्यादा आतंकियों/संगठनों में से फिलहाल सिर्फ 5 का पता लगाया है। इन 5 में लश्कर-ए- तैयबा/जमात-उद-दावा/ फलाह-ए-इंसानियत का सरगना हाफिज मोहम्मद सईद भी शामिल  है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने उसे टेरर फंडिंग के आरोप में जुलाई में गिरफ्तार किया था और तबसे वह कस्टडी में है।
एक रिपोर्ट्स के मुताबिक टेरर फंडिंग से जुड़ीं 900 से ज्यादा संपत्तियों को जब्त किया जा चुका है। इनमें मदरसे और डिस्पेंसरी भी शामिल हैं। इनमें से 750 संपत्तियां कथित तौर   पर फलाह-ए-इंसानियत से और 150 संपत्तियां जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी हुई हैं।
पाकिस्तान को अभी भी जब्त की गईं संपत्तियों को फंडिंग किस स्रोत से मिलती थी, इसकी पहचान करना और इन संपत्तियों के मालिकों के खिलाफ केस दर्ज करना बाकी है। इसके  अलावा किसी भी सक्रिय आतंकी अड्डे, आतंकी ट्रेनिंग कैंपों आदि की जब्ती नहीं की गई है। पिछले साल एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला था और उसे ब्लैकलिस्ट  होने से बचने के लिए 27 पॉइंट वाले एंटी-टेरर ऐक्शन प्लान को लागू करने के लिए कहा था। इस साल जुलाई में टेरर फंडिंग के 23 मामले दर्ज किए गए हैं। इन केसों में करीब 65  सक्रिय आतंकवादियों के नाम शामिल हैं। एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट होने से बचने के लिए 27 पॉइंट वाले ऐक्शन प्लान पर अमल के लिए 15 महीनों का वक्त दिया  था। हालांकि, इस दौरान पाकिस्तान टेरर फंडिंग के खिलाफ एक्शन का सिर्फ दिखावा करता रहा और दुनिया की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश करता रहा।

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