छह साल में बिकी 8000 इलेक्ट्रिक कार

Electric Car
नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की मुहिम शुरू की। कार निर्माता कंपनियां भी सरकार के साथ मुहिम में जुड़ी। हालांकि कार की कीमत हमेशा एक वजह  बनीं रही। ऐसे में कार को अफोर्डेबल बनाने के लिए केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक कार की खरीद पर सब्सिडी का ऐलान किया। लेकिन इसके बाद भी इलेक्ट्रिक कार की खरीददारी रफ्तार  नहीं पकड़ सकी।
एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पिछले 6 साल में महज 8000 इलेक्ट्रिक कार की बिक्री हुई है, जबकि इस मामले में भारत का प्रतिद्वंद्वी देश चीन कहीं आगे है। चीन में दो दिन  में औसतन 8000 इलेक्ट्रिक कार की बिक्री हो जाती है। आंकड़ों की मानें, तो भारत में करीब 15 करोड़ ड्राइवर हैं। इसमें से पिछले 6 साल में केवल 8 हजार ड्राइवर को इलेक्ट्रिक  कार पसंद आई। यह आंकड़े भारत सरकार की देश में इलेक्ट्रिक वाहन को बढ़ावा देने की मुहिम को कमजोर बनाते हैं। साथ ही देश में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने की  योजना भी खतरे में पड़ सकती है। आंकड़ों के मुताबिक भारत इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में चीन से काफी पीछे है। चीन इलेक्ट्रिक व्हीकल का बड़ा मार्केट है। इससे बड़ा  बनने की वजह वहां का इंफ्रास्ट्रक्चर है। चीन में करीब 4 लाख 56 हजार इलेक्ट्रिक चार्जिंग प्वाइंट हैं।
पीएम मोदी की तरफ से इस साल फरवरी में इलेक्ट्रिक कार के लिए 1.4 बिलियन डॉलर की सब्सिडी का ऐलान किया गया। लेकिन इलेक्ट्रिक कार कीमत अब भी भारतीय की पहुंच  से काफी बाहर है। देश के करीब एक तिहाई कार खरीददार 9999 डॉलर (7,08,184 रुपए) से ज्यादा नहीं खर्च करना चाहते हैं। अगर हुंडई की इलेक्ट्रिक कार कोना की करें, तो वह  भारत में करीब 30 लाख रुपए में आएगी।
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