क्यों डरती हैं महिलाए

थोड़ी-सी सहानुभूति मिलते ही औरत अपरिचित के सामने भी खुलती चली जाती है और अपने मन के अंदर की बातों तक को कह डालती है। आखिर कौन-सी ऐसी बातें हैं जनके कारण औरत  सहानुभूति देने वाले अजनबी पर भी पूरा विश्वास कर लेती है और मन के गुबारों को निकालकर राहत महसूस करती है।
एक सर्वेक्षण के अनुसार स्त्रियां अकेलेपन से और पुरूष नजदीकी से अधिक कतराते हैं। औरतों कोअकेलेपन में एक कमजोरी का अहसास होता है। उन्हें लगता है कि उनके अंदर कोई कमी है।  पनी इस कमी या कमजोरी का अहसास औरतों को कई बार बना सोचे-विचारे ऐसे -वैसे संबंध बनाने के लिए मजबूर कर देता है। वैसी औरतें, जो अपने एकाकीपन से भी संतुष्ट और सुखी हैं,  उनमें से अधिकांश औरतों ने एक ही बात को स्वीकार किया कि बना दोस्तों के, खासतौर पर महिला मित्रों के उनका जीना मुश्किल हो रहा है।
मित्रों से जीवन बेहतर ही नहीं हो जाता बल्कि जीवन लंबा भी हो जाता है। हाल ही की खोजों से यह पता चला है कि अकेलेपन से शरीर के रोग निरोधक क्षमता घट जाती है और जुकाम से  लेकर ढेर सारी अन्य बीमारियों की सभावनाएं बढ़ जाती हैं। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज के अनुसार ही मनुष्य के संस्कार भी बने होते हैं। अगर समूह से मनुष्य का संबंध टूट  जाता है तो फिर उसका जीना मुश्किल हो जाता है पर आज की भागदौड़ की जिंदगी में आदमी अकेलेपन से नहीं बच सकता। यह भी सच है कि अपने जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा आदमी अकेले बिताता है। अपना काम करते हुए, पढ़ते-लिखते हुए, पूजा, पाठ करते हुए, आदमी का बहुत सारा समय एकाकीपन में ही बीतता है। खासकर आज की औरतों का तो बहुत बड़े समय का हिस्सा अकेलेपन में ही गुजरता है। पति ऑफिस चला जाता है, बच्चे स्कूल चले जाते हैं और पूरे दन अकेले रह जाती हैं घरेलू स्त्रियां। इस समय को बिताने के लिए वे कभी टी.वी. का सहारा ले लेती हैं, तोकभी मैगजीनों का परन्तु इन विधियों से भी उनका एकाकीपन कम नहीं होता। कुछ लोग एकाकीपन में जीना बचपन से ही सीख लेते हैं और एकाकीपन को ही अपना मित्र बना लेते हैं। जो एकाकीपन का सामना नहीं कर पाती, वे आत्मसमर्पण करने पर मजबूर हो जाती हैं।
एकाकीपन में जीना सीखने के लिए प्रयास और धैर्य की आवश्यकता होती है और उम्र के बढ़ने के साथ-साथ ही यह सब सीखने को मिलता है। एकाकीपन से डरना ही कायरता है। उसका सामना  दृढ़ता के साथ करना चाहिए। एकाकीपन ऐसी कोई समस्या नहीं है व जिसके प्रभाव में आकर अपनी सेहत व चरित्र को दांव पर लगा दिया जाये। एकाकीपन को अपनी सहेली बनाइए और अपनी  क्षमता के हिसाब से घर में ही कार्य करना शुरू कर दीजिए। सिलाई, बुनाई के अलावा संगीत सिखाना, नृत्य सिखलाना, छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना आदि अनेक ऐसे कार्य हैं जो एकाकीपन के तनाव से मु€त रखते हैं और सेहत को भी बनाए रखते हैं।

Post a Comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget