अशोक तंवर ने छोडी कांग्रेस

Ashok Tanwar
चंडीगढ़/करनाल
हरियाणा कांग्रेस के पूर्व चीफ अशोक तंवर ने शनिवार को कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने के बाद पार्टी के भीतर की आंतरिक कलह को उजागर किया। उन्होंने कहा कि आज बहुत सी  ताकतें ऐसी हैं, जो कहती हैं कि देश को कांग्रेस मुक्त करना है, पर कांग्रेस मुक्त उनसे नहीं हो रहा है। तंवर ने कहा कि वास्तव में कांग्रेस के भीतर ही कुछ लोग हैं, जो भारत और  हरियाणा को कांग्रेस मुक्त करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आज पार्टी अस्तित्व के संकट से जूझ रही है, उसकी वजह बाहरी नहीं आंतरिक है। आगे क्या भाजपा में जाएंगे, इस  सवाल पर उन्होंने कहा कि फिलहाल वह किसी भी पार्टी में नहीं जा रहे हैं।

भाजपा में नहीं देंगे एंट्री : खट्टर
उधर, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष को भाजपा में शामिल करने की किसी भी संभावना से शनिवार को इंकार कर दिया। खट्टर ने विपक्ष  की आलोचना करते हुए कहा कि टिकट आवंटन में तंवर के आरोपों ने पार्टी को बेनकाब कर दिया। उन्होंने कहा कि सिर्फ उन लोगों को भाजपा में शामिल किया जाएगा, जिनका  अतीत साफ-सुथरा हो और उन पर कोई धब्बा नहीं हो। खट्टर ने पत्रकारों से कहा कि हम उन्हें (तंवर) प्रवेश (भाजपा में) नहीं देंगे। भाजपा द्वारा उन्हें पार्टी में शामिल होने का  आमंत्रण मिलने की तंवर की कथित टिप्पणी के बारे में किए गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूरी तरह से गलत है। खट्टर ने कहा कि अगर भाजपा ने उन्हें (तंवर) आमंत्रित  किया होता तो, वह अब तक पार्टी में आ गए होते।

राहुल के करीबियों को किनारे लगाया जा रहा
कुछ दिन पहले ही तंवर को प्रदेश कांग्रेस के मुखिया के पद से हटा दिया गया था। मुंबई कांग्रेस के नेता संजय निरूपम की तरह अशोक तंवर ने भी कहा है कि कांग्रेस में राहुल  गांधी के करीबियों को किनारे लगाया जा रहा है और उनके खिलाफ साजिश हो रही है। तंवर ने कहा कि उनके सामने पार्टी छोड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। उन्होंने यह भी  कहा है कि वह फिलहाल भाजपा या किसी अन्य पार्टी में शामिल नहीं होने जा रहे। अशोक तंवर ने आगे कहा कि जो लोग सिस्टम में अच्छे से स्थापित हैं, वे अच्छे से लोगों का  दोहन करते हैं। वे एसी कमरों में बैठते हैं, विदेश यात्राओं पर जाते हैं और पांच साल पैसे कमाते हैं। चुनाव के ठीक पहले वे ऐसे अवतरित हो जाते हैं, जैसे देवी-देवता हों, लेकिन  उनके कर्म देवी-देवता वाले नहीं हैं, कर्म राक्षसी हैं। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पार्टी में पैसे, ब्लैकमेलिंग और दबाव बनाने रणनीति काम कर रही है। तंवर ने पार्टी के प्रभारी  महासचिव गुलाम नबी आजाद और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि इन नेताओं के साथ 'सेटिंग' ही टिकट पाने का सबसे महत्वपूर्ण  मापदंड बन गया है, ऐसे में पांच साल मेहनत करने वाले कई कार्यकर्ता टिकट पाने से उपेक्षित रह गए।

कुछ की राजनीतिक हत्या की गई, कुछ की होनी बाकी
तंवर ने कहा कि पिछले पांच साल मैंने और मेरे साथियों ने खून पसीना एक करके कांग्रेस को बचाने का काम किया। कांग्रेस के खिलाफ साजिश करके उसे मारने वाले कौन थे,  आपके सामने है। बचाने का काम हमारे साथियों ने किया। कुछ लोगों की राजनीतिक हत्या कर दी गई है, कुछ की होनी बाकी है। जिनकी हो चुकी है, उसमें मैं भी हूं।
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