महात्मा गांधी और उनका संदेश

आज पूरा राष्ट्र महात्मा गांधी की जयंती मना रहा है। शायद दुनिया में कोई ऐसी जगह नहीं है, जहां महात्मा गांधी का नाम सम्मान से न लिया जाता हो। उनके संदेश आज भी  इतने प्रासंगिक हैं कि आज भी दुनिया के सभी विश्वविद्यालयों में उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर अध्ययन और शोध हो रहा है। न जाने कितने महानगरों में उनकी मूर्तियां उïनकी   कीर्ति पताका फहरा रही है। सत्य और अहिंसा के बलबूते पर उनके द्वारा लड़ी गई स्वतंत्रता की लड़ाई न जाने कितने देशों के नेताओं के लिए प्रेरणा बनी  और आज भी मार्गदर्शन  कर रही है। उनकी प्रमुख पहचान एक जन नेता की है। उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए लंबे चले संघर्ष का नेतृत्व किया और इसे जन-जन का आंदोलन बनाया, परंतु उनकी सोच  सिर्फ राजनैतिक दासता से मुक्ति तक सीमित नहीं थी। इसमें देश के हर अंग के विकास का स्वप्न था, दृष्टि थी, जो उनके लेखों, कार्यों से सतत परिलक्षित होती रही है। उन्होंने हर  तरह से सुखी, समृद्ध, भेदभाव से मुक्त समृद्ध भारत की संकल्पना ही नहीं की, बल्कि अपने आचार-विचार, व्यवहार तथा कार्यों से यह दिखाया कि जो उनकी संकल्पना है, जो उनके  लक्ष्य है वह प्राप्त किया जा सकता है। उस सपने को यथार्थ में बदला जा सकता है। उनकी दृष्टि में एक ऐसा भारत था, जहां रामराज्य हो, मतलब जहां कोई दीन, दुखी, बीमार और  अकिंचन न हो। यह किया जा सकता है। जिस तरह की प्रगति आज देश में चारों ओर दिखाई दे रही है और जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है यह जताता है कि जो भी गांधी का   सपना था, संकल्पना थी, वह उनकी ही राह पर चलकर पूरी हो रही है। सादा जीवन और उच्च विचार का उनका घोषवाक्य अजर अमर है तथा आज भी उतना ही प्रासंगिक है,  जितना कल था। हमारे देश में भले ही तमाम तरह के राजनीतिक प्रवाह और विचारधाराएं हैं, परंतु गांधी और उनके योगदान और उनके विचारों और कार्यों की महत्ता को लेकर कोई  मतभेद नहीं है। लगभग हर दल आज भी उनके विचारों को देश के विकास के लिए प्रकाशस्तंभ मानते हैं और यही कारण है कि आजादी से लेकर आज तक कई ऐसी सकारात्मक  नीतियों की शुरुआत गांधी जयंती से हुई है और जिनके परिणाम भी काफी अच्छे आए हैं और आ रहे हैं। किसी महान विभूति की पुण्यतिथि या जयंती मनाने का उद्देश्य उनकी स्मृति  को अभिवादन कर उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापन के साथ-साथ उनके सिद्धांतो पर, उनके जन कल्याणकारी और सर्वकालिक विचारों और मूल्यों पर समर्पित करने के लिए होता है। आज  भी हमारे समाज में ऐसी तमाम नकारात्मकताएं हैं, जिनसे महात्मा गांधी इस धराधाम को मुक्त देखना चाहते थे। आज भी हमारे समाज में तरह-तरह की सस्याएं कराह कर रही है,  तो आइए आज बापू की जयंती के इस पावन अवसर पर संकल्प लें उन विचारों, मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन का, जिससे उनके सपनों के अनुरूप भारत का दर्शन पूरी दुनिया कर   सके। यही उनकी स्मृति को असली श्रद्धांजलि होगी। हमारी केंद्र सरकार इस अवसर पर तमाम ऐसे कार्यों का श्रीगणेशा कर रही है, जिस पर चल कर और उन्हें अमली जामा पहना  कर पूरा देश हर तरह से चुस्त-दुरुस्त होगा और यही बापू का सपना था, जिसे यथार्थ में बदलने के लिए उन्होंने आजीवन संघर्ष किया।

Post a Comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget