रमाकांतयादवऔरफूलन देवीकीबहनसपामेंशामिल

लखनऊ
पूर्वांचल के दिग्गज नेता रमाकांत यादव की समाजवादी पार्टी (एसपी) में घर वापसी हो गई है। रविवार को अखिलेश यादव की मौजूदगी में यादव अपने समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी में  शामिल हुए। इस दौरान फूलन देवी की बहन रु€िमणी देवी निषाद ने भी समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। वहीं, बीएसपी के पूर्व एमएलसी अतहर खां भी एसपी में शामिल हुए। पार्टी अध्यक्ष  अखिलेश यादव की मौजूदगी में अंबेडकरनगर, कुशीनगर, उन्नाव, गाजीपुर के बीएसपी और कांग्रेस के कई कार्यकर्ता भी एसपी में शामिल हुए। इस मौके पर रमाकांत यादव ने कहा कि अपने घर  परिवार में आने के बाद खुश हूं। देश के जो हालात और राजनीतिक समस्या है, हर कोई आशा भरी निगाह से अखिलेश की ओर देख रहा है। सांप्रदायिक और फिरकापरस्त ताकतों का फन  अखिलेश ही कुचल सकते हैं। एक सिपाही के रूप में, कार्यकर्ता के रूप में मैं काम करूंगा। उधर, एसपी में शामिल होने के बाद फूलन देवी की बहन रु€िमणी देवी निषाद ने कहा कि ताली पीटने से नहीं एक-एक वोट बटोरने से जीत मिलेगी। इस मौके पर अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी परिवार बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि कोशिश होगी कि अधिक से अधिक साथियों को जोड़ा जाए,  जिससे चुनौती का मिलकर सामना किया जा सके। रमाकांत यादव के बारे में अपनी राय रखते हुए अखिलेश ने कहा कि उनके साथ कई बार काम किया है। बीच में दूरियां बनी, लेकिन अब कोई  दूरी नहीं रहेगी। इस दौरान उन्होंने भाजपापर हमला भी बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा अपनी ताकत से सरकार नहीं बना सकती। दूसरी पार्टी के हर चेहरे जो उन्हें फायदा दिला सकते हैं, उन्हें  पनी पार्टी में शामिल करा लिया चाहे उसके लिए कुछ भी करना पड़े। गांधीजी ने अहिंसा और सत्य का सिद्धांत दिया, लेकिन कमाल की भाजपा है कि वह रास्ते पर चलना ही नहीं चाहते। विधानसभा में सरकार झूठ बोल रही है। मेट्रो से लेकर पूर्वांचल एक्सप्रेस तक हमारे प्रॉजेक्ट हैं। आजमगढ़ लोकसभा सीट से भाजपा द्वारा भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ को  चुनावी मैदान में उतारने के बाद रमाकांत यादव कांग्रेस में चले गए थे। हालांकि एसपी में शामिल होने की खबर के बीच 3 अक्टूबर को कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से बर्खास्त कर दिया। रमाकांत यादव  का राजनीतिक सफर 1996 में समाजवादी पार्टी से हुआ। 1999 में फिर वह एसपी के टिकट पर जीते। 2004 में रमाकांत बीएसपी में गए और फिर जीत दर्ज की। 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपाने रमाकांत पर दांव चला और फिर उनकी जीत हुई। हालांकि 2014 में भी वह भाजपा के उम्मीदवार थे और उनके साथ मोदी लहर भी थी, लेकिन एसपी संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने  उन पर जीत दर्ज कर एक बार समाजवादियों के इस गढ़ को अपने पाले में ले जाने में सफल रहे। 
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