बाबासाहब की तरह मैं भी अपना लूंगी बौद्ध धर्म : मायावती

Mayavati
नागपुर/मुंबई
महाराष्ट्र चुनाव के लिए नागपुर में एक जनसभा को संबोधित करने पहुंचीं बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने कहा कि वह भी बाबासाहब भीमराव आंबेडकर की तरह बौद्ध  धर्म को अपनाएंगी। मायावती ने कहा कि बौद्ध धर्म की अनुयायी बनने के लिए वह भी भीमराव आंबेडकर की तरह दीक्षा लेंगी, लेकिन सही समय पर इसका फैसला किया जाएगा।   नागपुर में अपनी सभा के दौरान मायावती ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने अपने देहांत से कुछ वक्त पहले अपना धर्म परिवर्तन कराया  था। आप लोग मेरे धर्म परिवर्तन के बारे में भी सोचते होंगे। मैं भी बौद्ध धर्म की अनुयायी बनने के लिए दीक्षा अवश्य लूंगी, लेकिन यह तब होगा जब इसका सही समय आ जाए।  ऐसा तब होगा जब पूरे देश में बड़ी संख्या में लोग ऐसा धर्मांतरण करें। धर्मांतरण की यह प्रक्रिया भी तब ही संभव है, जब बाबासाहब के अनुयायी राजनीतिक जीवन में भी उनके  बताए रास्ते का अनुसरण करें। बाबासाहब आंबेडकर ने धर्मनिरपेक्षता के आधार पर संविधान बनाया था। उन्होंने धर्मनिरपेक्षता के आधार पर सभी धर्म के लोगों का ख्याल रखा था।  बसपा प्रमुख ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार की विफल नीतियों की वजह से मौजूदा आर्थिक सुस्ती आई है। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी पार्टी कांग्रेस  और सत्तारूढ़ बीजेपी की सरकारी नौकरियों में पदोन्नति के लिए दलितों और अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण को रोकने के लिए आंतरिक समझ है। दलितों और अनुसूचित  जनजातियों के हितों के लिए बनाए गए कानूनों को सरकार ने निष्प्रभावी कर दिया है। इससे देश में वंचितों का शोषण करने वालों को बढ़ावा मिला है। बता दें कि संविधान निर्माता  बाबासाहब भीमराव आंबेडकर ने 14 अप्रैल 1956 को नागपुर की 'दीक्षाभूमि' में बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी। भीमराव आंबेडकर को 1942 में भारत आकर बसे बौद्ध भिक्षु प्रज्ञानंद ने सात भिक्षुओं के साथ बौद्ध धर्म की दीक्षा दी थी।
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