फैसले से पहले चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबल तैनात

अयोध्या
 अयोध्या विवाद पर 17 नवंबर तक सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश और उससे सटे मध्य प्रदेश में भी पुलिसकर्मियों की छुट्टियां अग्रिम आदेशों  तक रद्द कर दी गईं हैं। पुलिस सोशल मीडिया की निगरानी के साथ-साथ सभी ऐहतियाती कदम उठा रही है। अयोध्या भी फैसले की नजदीक जाती तारीखों के साथ छावनी में तब्दील होने लगी है। 
बुधवार को अयोध्या की सड़कों पर आरएएफ की टीमें नजर आईं। सुरक्षा व्यवस्था में तैनात इन टीमों की चप्पे-चप्पे पर नजर है, जिससे किसी भी अप्रिय स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।  धर फैसले के मद्देनजर बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने मुस्लिम नेताओं के साथ दूसरे पक्ष को साधने में जुटा है। कोशिश की जा रही है कि इन सभी नेताओं को इस बात पर सहमत  किया जाए कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सर्वमान्य होगा ताकि समाज में शांति और कानून व्यवस्था प्रभावित न हो। इन बातों को ध्यान में रखते हुए मंगलवार को केंद्रीय मंत्री मुब्तार अब्बास नकवी के आवास पर एक बैठक की गई थी।
 शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जव्वाद ने अयोध्या के संदर्भ में  केंद्रीय मंत्री मुब्तार अब्बास नकवी के घर में हुई बैठक के बाद कहा कि सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला देता है कि हम सभी को  उसका सम्मान करना चाहिए। हम फैसले के साथ ही सभी से शांति बनाए रखने की अपील करेंगे। ऑल इंडिया सूफी सज्जादनशीं काउंसिल के चेयरमैन सैयर नसेरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि बैठक में  इस बात पर एक मत था कि सभी धर्मों के लोगों को सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानना चाहिए। हम सभी दरगाहों को लोगों से अपील करते हुए इस बात के निर्देश देंगे कि अफवाहों और झूठी ख़बरों  पर यकीन न किया जाए।
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