सेवा शुल्क से मनपा की बध़्एगी आय

ठाणे
ठाणे महानगर पालिका की सीमा में विभिन्न जगहों पर वनजमीनी, एमआयडीसी और सरकारी जमीं पर पिछले कई वर्षों से बसे झोपड़ा धारकों पर सेवा शुल्क लघाने का निर्णय  पिछले सप्ताह लिया। इस निर्णय से इन झोपड़ा धारकों को ब्लस्टर और अन्य सरकारी गृह आवास में पक्के हक का घर मिलने का रास्ता साफ हो गया है, तो वहीं इससे मनपा की  तिजोरी में तकरीबन 50 करोड़ रुपए का वृद्धि होने वाला है।
गौरतलब है कि ठाणे महानगर पालिका का एक-दो क्षेत्र वन विभाग से जुदा हुआ है। इसमें से एक संजय गांधी राष्ट्रिय उद्यान से लगा हुआ परिसर है, तो दूसरा मुंब्रा- कलवा रेल  लाइन से लगा हुआ है। इन जगहों पर बड़ी संख्या में वन विभाग की जमीन पर अवैध रूप से झोपड़े बन चुके है, लेकिन इन पर मनपा प्रशासन टैक्स नहीं लगा पाई है, जबकि इन्हें  मनपा की तरफ से पानी और बिजली तथा रास्ता सभी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। इसके आलावा वागले इस्टेट का कुछ परिसर एमआईडीसी के तहत आता है यहां पर भी हजारों  की संख्या में झोपड़े बने है। इसमें से कुछ झोपड़ों का टैक्स लगा है, लेकिन अभी कई झोपड़े है जिनका टैक्स नहीं लगा है। ऐसे में अब इन झोपड़ों को ब्लस्टर और अन्य सरकारी  गृह आवास योजना में पक्के घर मिल सकें इसके लिए बुधवार की महासभा में सर्वदलीय नगरसेवकों ने टैक्स के बदले सेवा शुल्क लगाने की मांग किया था जिसे तत्कालीन पीठासीन  अधिकारी व महापौर मीनाक्षी शिंदे नर मंजूरी दिया था। इस निर्णय के अनुसार अब वर्ष 2014 के पहले और इस दौरान जितने भी घर बने है उन्हें सेवा शुल्क लगाने की तैयारी  मनपा प्रशासन ने किया है। मनपा शहर विकास विभाग का कहना है कि एक सर्वे के अनुसार इस प्रकार मनपा की सीमा में तकरीबन 12 से 15 हजार घर है। ऐसे में इन घरों को  अब सेवा शुल्क लगाने से मनपा की वार्षिक आय में करीब 45 से 50 करोड़ की वृद्धि हो सकती है। साथ ही इन घरों को नियमानुसार ब्लस्टर और अन्य सरकारी गृह आवास योजना  में शामिल किये जाने का मार्ग खुल जाएगा और लोगों को उनके हक का घर मिल सकेगा।
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