घरेलू औषधि है नीम

Neem
कहा जाता है कि अंग्रेजी दवा डिटोल जितनी हमारे लिए उपयोगी होती है उससे कहीं अधिक मित्र वृक्ष नीम के पत्तों का उबला हुआ पानी उपयोगी होता है। इस पानी को अगर  सब्जियों, फसलों पर कीटनाशक के स्थान पर छिड़काव करें तो कीटों का तो नाश होगा ही, साथ ही सब्जियों और अनाजों के खाने पर कीटनाशकों का जो असर व्यक्तियों में देखने  को मिलता है, उससे भी स्वत: छुटकारा पाया जा सकता है, यही वजह है कि भारतीय मूल के प्राचीन ऋषियों- मुनियों ने इसको सर्वश्रेष्ठ वृक्षों में से एक कहा है। नीम सर्वाधिक रोगों  को दूर करने वाली अनमोल औषधियों का भण्डार है जो मनुष्य के स्पूर्ण शारीरिक व्याधियों को रोकने के लिए उत्तम वैद्य है। नीम की जड़ तना, छाल, फूल, पत्तियां एवं फल  निंबोली सभी का आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली में एक विशेष महāव देखा गया है। बस जरूरत है तो केवल इसके उपयोग की सटीक जानकारी की। औषधि के रूप में विख्यात नीम के  लाभ न्निलिखित प्रकार से हैं।

फोड़े-फुंसी की समाप्ति
आयुर्वेद के अनुसार इसकी सूखी छाल को पानी के साथ घिसकर फोड़े-फुंसी पर लेप लगाने से बहुत लाभ मिलता है और धीरे-धीरे इनकी समाप्ति हो जाती है।

पेट एवं चर्म रोगों में लाभदायक
देखने में आया है कि नीम की नई कोपलों को आज भी ग्रामीण लोग चैत्र मास में खाना बेहद पसंद करते हैं क्योंकि एक माह तक लगातार ऐसा करने पर इससे पेट की बीमारियों के  अतिरिक्त वर्षा ऋतु में उत्पन्न होने वाली त्वचा संबंधी परेशानियों से भी निजात पाई जा सकती है।

दांतों की सुरक्षा
प्रत्येक जगह मिलने वाली नीम की पतली टहनी के रूप में मौजूद दातुन भी व्यक्ति के लिए बड़ी उपयोगी सिद्ध होती हैं। इसके निरंतर प्रयोग से दांतों की सफाई के साथ- साथ दांतों  में लगने वाले कीड़ों से भी रक्षा की जा सकती है। दांतों को मजबूती मिलती है।

कुष्ठ रोग में आराम
चिकित्सकों के शब्दों में, नीम के कोमल एवं नवीन पत्ते कुष्ठ रोग में काफी लाभप्रद हैं। इससे व्यक्ति के कुष्ठ रोग को शांत किया जा सकता है।

रक्त संबंधी विकारों से मुक्ति
वैसे तो नीम के बीजों का तेल किंचित कड़वा ही होता है जो मनुष्य के खून संबंधी विकारों का नाश करता है। इसके अलावा, यह ज्वर, कफ और पित्त जैसे रोगों  का भी भली-भांति  शमन करता। इस प्रकार निष्कर्ष के तौर पर हम यहां कह सकते हैं कि भारत में बहुतायत मात्र में पाया जाने वाला सुप्रसिद्ध वृक्ष नीम बहुगुणों व औषधियों से युक्त होने के कारण आज की तारीख में भी ग्रामीण क्षेत्रों में काफी उपयोगी सिद्ध हो रहा है जिससे वहां के लोग इसे एक डिस्पेन्सरी के रूप में देखते हैं और आयुर्वेद के मुताबिक इसके बीज, पत्तियों और  छालों का सटीक उपयोग करके शरीर में मौजूद विभिन्न प्रकार की व्याधियों को दूर कर लाभ उठाते हैं।

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