भ्रष्टाचार आतंकवाद मे लगातार सजा पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली
उच्चतम न्यायालय उस जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है, जिसमें भ्रष्टाचार तथा आतंकवाद के मामलों में एक साथ कैद के बजाय एक के बाद एक सजा का  निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। अमेरिका जैसे देश में किसी अपराधी को अलग-अलग मामलों में एक साथ सजा देने के बजाय एक के बाद एक सजा भुगतनी होती है। प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति बीआर गवई और सूर्य कांत की तीन सदस्यीय पीठ ने भाजपा नेता एवं अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की इस दलील को स्वीकार किया कि इस  याचिका पर तत्काल सुनवाई की जरूरत है। शीर्ष अदालत ने इस साल मार्च में ही केंद्र को इस मामले में नोटिस जारी किया था। उपाध्याय ने कहा कि याचिका पर केंद्र का जवाब आ  गया है और अब यह मामला सुनवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। अत: इसे शीघ्र सूचीबद्ध किया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि मामले को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध  किया जाए। याचिका में कहा गया है कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के प्रावधान के तहत दोषी व्यक्ति अलग- अलग अपराधों के लिए एक साथ सजा काट सकता है, लेकिन यह  प्रावधान नृशंस अपराधों के लिए लागू नहीं होना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 31 को गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून, भ्रष्टाचार रोकथाम  कानून, बेनामी संपत्ति लेन-देन निषेध कानून, मनी लांड्रिंग एक्ट, विदेशी योगदान (विनिमय) कानून, कालाधन एवं कर चोरी कानून और भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून जैसे विशेष  अधिनियमों पर लागू नहीं किया जाना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि समाज में आतंकवाद फैलाकर धन कमाना संगठित अपराधियों का उद्देश्य है। इसलिए पैसे का इस्तेमाल  राज्य की अर्थव्यवस्था को पटरी से उतारने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इसलिए जघन्य अपराध के दोषियों को कठोरतम सजा दी जानी चाहिए। मकोका में तीन से 10 सजा  का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर आजीवन कारावास किया जा सकता था। सीआरपीसी की धारा 31 में प्रावधान है कि विभिन्न अपराधों के तहत अलग-अलग सजा दी जा सकती है,  लेकिन यदि कोर्ट विशेष रूप से इसका उल्लेख नहीं करता है, तो सजा साथ-साथ चलेगी।

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