प्रदूषण पर पड़ोसी राज्य भी दें ध्यान: केजरीवाल

Kejariwal
राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंच जाने के कारण आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है, वहीं विजिब्लिटी कम होने से  कई उड़ानों का रास्ता बदल दिया गया है। दिल्ली की जनता जहां केंद्र और आप सरकार से ठोस उपाय किए जाने की उम्मीद कर रही है, वहीं दोनों के बीच ब्लेम-गेम जारी है। सीएम  अरविंद केजरीवाल ने कहा कि राजधानी वासियों ने पलूशन रोकने के लिए पिछले कुछ सालों में काफी काम किया है और अब पड़ोसी राज्यों की बारी है कि वे पराली से होने वाले  धुएं को रोकने के लिए काम करें। उन्होंने इसके साथ ही दिल्लीवासियों से अपील की कि वे सोमवार से लागू हो रहे ऑड-ईवन स्कीम का ईमानदारी से पालन करें। केजरीवाल ने  अपने वीडियो संदेश में कहा कि बाहर हर तरफ धुआं ही धुआं है और लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। इसमें दिल्लीवासियों का क्या कसूर है। उन्होंने 10 अक्टूबर से पहले  और आज के आसमान की तस्वीर भी दिखाई और बताया कि कैसे राजधानी में पहले आसमान नीला दिख रहा था और अब धुआं है। उन्होंने पूछा कि 20 दिनों के अंदर क्या हुआ?  क्या राजधानी में लोगों ने इन दिनों के भीतर करोड़ों गाड़ियां खरीद लीं या इंडस्ट्री लग गई? केजरीवाल ने पलूशन के लिए पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने को दोष देते हुए कहा कि  पहले राजधानी में पलूशन रहता था, लेकिन पिछले कुछ सालों में सरकार और आम लोगों ने मेहनत की, जिससे प्रदूषण कम हुआ है। अपना काम गिनाते हुए केजरीवाल ने कहा कि  पहले बिजली खूब जाया करती थी। राजधानी में हर रोज 5- 6 लाख जनरेटर चलते थे, जो बिजली के कारण बंद हो गए हैं। धुआं और पलूशन कम हुआ। हम सब लोगों ने कई एकड़  जमीन पर पेड़ लगाए हैं। राजधानी का वन्य क्षेत्र बढ़ा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने दिल्ली के दोनों तरफ ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे बनाए, जिससे ट्रक दिल्ली में  नहीं आते। उससे भी पलूशन कम हुआ है। उन्होंने पड़ोसी राज्यों पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली वाले जो कर सकते थे उन्होंने किया। इस बार पटाखे कम जलाए गए। हमने  लेजर शो के जरिए पटाखे से लोगों को दूर रखने की कोशिश की, लेकिन फिर भी राजधानी में धुआं आ रहा है। केजरीवाल ने कहा कि पराली जलाए जाने से धुआं यहां आ रहा है।  हमें उसे रोकना है। सब मिलकर आइए और धुआं को रोकने की कोशिश करें। इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा में 27 लाख किसान हैं और  65 हजार मशीनें बटी हैं जो किसानों को पराली जलाने की जगह अलग तरीके से फसल काटने में मदद करती हैं।

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