मनपा प्रशासन उदासीन एनजीटी की उड़ा रहा धज्जिया

उल्हासनगर
 शहर के कैंप पांच स्थित अस्थाई बनाए गए डंपिंग ग्राउंड को शहरवासियों और नगरसेवकों के डंपिंग के विरोध और मांग पर 24 सितंबर 2019 को हटाने का प्रशासन द्वारा आदेश दिया गया था।  दो माह बीत जाने के बाद अभी तक कोई भी ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका है। मनपा प्रशासन ने अपनी मनमानी करते हुए एनजीटी के आदेश की धज्जियां उड़ा दी है, बता दें कि वर्ष 2016  में मनपा के तत्कालीन आयुक्त राजेंद्र निंबालकर ने उल्हासनगर 5 में अस्थायी डंपिंग ग्राउंड बनाया था,जहां शहर का कचरा फेंका जा रहा था, उल्हासनगर के एक साधारण नागरिक राजकुमार करेजा ने एनजीटी नेशनल ग्रीन ट्रिŽयून हरित लवाद का दरवाजा खटखटाया, एनजीटी द्वारा उल्हासनगर मनपा और ठाणे जिलाधिकारी को निर्देश दिए गए कि दो महीनों में डंपिंग ग्राउंड हटाया  जाए, उल्हासनगर कैंप पांच का अवैध डङ्क्ष्पग ग्राउंड तीन साल पहले सर्वोच्च न्यायालय की अवहेलना करते हुए शहर के बीचों-बीच रहिवासी परिसर में शुरू हुआ था, बता दें कि 3 वर्ष से  पत्रव्यवहार, आंदोलन धरने, हस्ताक्षर अभियान, स्थानीय नगरसेवकों द्वारा महासभा में हंगामा समेत उपाययोजना करने के बाद भी कार्रवाई न होती देख उल्हासनगर के आम नागरिक राजकुमार  सुंदरदास कुकरेजा द्वारा पिछले 1 साल की मेहनत, कागजी खानापूर्ति करते हुए डंपिंग ग्राउंड हटाने के मामले को राष्ट्रीय हरित लवाद यानी कि नेशनल ग्रीन ट्रिŽयून कमीशन की नजर में लाया  गया। 
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