अभिनव प्रयोग के लिए साधुवाद

हमारे देश के प्रशासन को लेकर हमेशा एक बात कही जाती है कि यदि हमारी नौकरशाही अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वाहन करें, तो व्यवस्था को चाक-चौबंद होने में देर नहीं लगेगी। हमने देखा है कि सूरत, नासिक, नागपुर जैसे कई शहरों में सिर्फ एक अधिकारी की इच्छशक्ति ने ऐसा परिवर्तन किया है कि देखने वाला वाह-वाह कर उठता है। यदि पूरे देश में ऐसे ही समर्पण और  सूझ-बूझ के साथ काम होता है, तो देश का चेहरा-मोहरा बदलता नजर आएगा।
अधुनातम उदाहरण के रूप में मुंबई मनपा आयुक्त की नई मुहिम 'गड्ढे दिखाओ 500 रुपए पाओ' का उल्लेख किया जा सकता है, जिसको शानदार प्रतिसाद मिला है और 24 घंटे के अंदर वे गड्ढे  पाटे भी जा चुके हैं। अब मुंबई में इसे मिले प्रतिसाद के मद्देनजर देश के अन्य शहरों में भी इस तरह की योजना लागू करने की मांग उठ रही है। वैसे भी परदेशी ने जबसे मुंबई आयुक्त का  कार्यभार संभाला है, तबसे मनपा के काम करने के तौर-तरीके में व्यापक बदलाव लाया है। वह चाहे बेस्ट की समस्या हो या कोई और बात, उन्होंने तेजी और सूझ-बूझ से उनके सामने चुनौतियों  का सामना किया है और जिसके अच्छे परिणाम भी आ रहे हैं, जो यह जताता है कि यदि कोई अधिकारी अपने पास अधिकारों का सही और समुचित इस्तेमाल सूझ-बूझ से करें, तो बड़ी से बड़ी  समस्या का चुटकी बजाते ही निवारण हो सकता है। मुंबई के ये प्रयोग आसपास की मनपाओं और नपाओं या यों कहे राज्य के अन्य स्थानीय निकायों में भी अपनाए जाने चाहिए।  इससे उक्त शहरों का कायाकल्प होगा और उनके बाशिंदों का जीवन भी सुखद होगा। इसके पहले मुंबई में गड्ढे भरने में मानसून के बाद काफी समय लगता था, परंतु इस अभिनव मुहिम ने उस काम को  आसानी से करवा दिया और शहर की जनता को भी सीधे इससे जोड़ दिया। जनता के ध्यान दिलाने के बाद उक्त काम का होना जनभागीदारी को भी सुनिश्चित करता है और सही हो यह भी  सुनिश्चित करता है।
नौकरशाही हमारी शासन व्यवस्था का स्थायी अंग है। निर्वाचित प्रतिनिधि चाहे वह स्थानीय निकाय का हो या चाहे विधायिका का, उसकी एक समय-सीमा होती है और उसका काम नीति निर्धारण  तक ही सीमित रहता है, जबकि नौकरशाही उसके क्रियान्वयन की जिम्मेदार होती है। इसके ऊपर लापरवाही, भ्रष्टाचार के तमाम आरोप लगते रहे हैं, परंतु हर युग में ऐसे लोगों की भी कमी नहीं  रही, जिन्होंने एक सच्चे जनसेवक की भूमिका निभाते हुए अपने कार्यों से उस क्षेत्र के विकास की नई इबारत लिखी, जो अमिट है। जो नाकाबिल तत्व हैं या भ्रष्टाचारी है उनपर लगाम कसने का सिलसिला मोदी युग में राज्यों और केंद्र में जोरशोर से शुरू है, परंतु जो अच्छे हैं, उन्हें जनता और सरकार की सराहना भी मिलती रही है। परदेशी उस श्रेणी के अधिकारी हैं तथा अपनी हर  जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हैं। मुंबई और आस-पास की नपाओं और मनपाओं के आयुक्तों को भी उनका अनुसरणकरने की जरूरत है और जो शक्ति उनके हाथों में सन्निहित है, उसका उन्हें  ऐसा अधिकतम उपयोग करना चाहिए, जिससे क्षेत्र की समस्याएं तिमिर तिरोहित हों और हर तरह से वहां की सेवा सुविधा उत्कृष्ट हो, इसीमें सबका भला है। अपनी शक्ति का उपयोग कर उसका  यथोचित नियोजन और उसमें नए-नए प्रयोग ही सही राह निकालते हैं। बशर्ते उनका अमल इमानदारी से हो और वैसा होता हुआ जनता जनार्दन को दिखें। 

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