सुधांशु द्विवेदी और पीके गुप्ता तीन दिनों की रिमांड पर

लखनऊ
 बिजली इंजीनियरों और कर्मचारियों केभविष्य निधि घोटाले में उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन के तत्कालीन निदेशक वित्त सुधांशु द्विवेदी, सचिव ट्रस्ट पीके गुप्ता और पूर्व एमडी एपी मिश्र की गिरक्तारी के बाद आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा ने जांच की गति तेज कर दी है। ईओडब्ल्यू ने बुधवार को सुधांशु द्विवेदी और पीके गुप्ता को सात दिनों की पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दी, जिस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों को तीन दिनों की पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेजा है। घोटाले की जांच कर रही ईओडब्ल्यू को सिविल जज जूनियर डिवीजन ने बुधवार शाम 4 बजे से 9 नवंबर तक की कस्टडी  रिमांड दी है। अब कस्टडी रिमांड पर लेकर ईओडब्ल्यू दोनों से पूछताछ शुरू करेगी। इसके साथ ही हजरतगंज पुलिस ने पूर्व एमडी एपी मिश्रा को भी कोर्ट में पेश किया। ईओडब्ल्यू घोटाले की तह तक जाने के लिए पूर्व एमडी एपी मिश्रा से दोनों अन्य आरोपियों का सामना कराने की भी तैयारी की जा रही है।
पावर कॉर्पोरेशन के पूर्व एमडी एपी मिश्र की गिरक्तारी के बाद डीजी ईओडब्ल्यू डॉ.आरपी सिंह ने कहा कि पीएनबी हाउसिंग में भी भविष्य निधि की रकम नियम विरुद्ध निवेश की गई थी। उन्होंने दावा किया कि पूर्व  एमडी एपी मिश्र के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। मिश्र पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह के करीबी रहे हैं। सपा शासन के दौरान नियमों में बदलाव कर एपी मिश्र को प्रबंध निदेशक के पद पर सेवा विस्तार दिया जाता रहा। ट्रस्ट के चेयरमैन होने के नाते पावर कॉर्पोरेशन के तत्कालीन अध्यक्ष संजय अग्रवाल सहित कई और बड़ों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।  सरकार घोटालों और भ्रष्टाचार में छोटे अफसरों पर तो कार्रवाई कर रही है, लेकिन आईएएस अफसरों पर हाथ डालने से बच रही है। सीबीआई की छापेमारी में आईएएस अफसर अभय, विवेक,  डीएस उपाध्याय सहित कई अफसरों के घर से पैसे बरामद हुए, जबकि पीएफ घोटाले में केंद्रीय प्रतिनियुफ्ति पर तैनात आईइएस संजय अग्रवाल का नाम आ रहा है।
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