भागलपुर यूनिवर्सिटी की लापरवाही से जमुई के 32 छात्रों का कैरियर 'बर्बाद

जमुई
भागलपुर विश्वविद्यालय की लापरवाही का खामियाजा जमुई के छात्र उठा रहे हैं। जी हां, स्नातक पास होने के बाद भी इन छात्रों का रिजल्ट पेंडिंग में बताया गया है, जिस कारण  छात्रों की परेशानी बढ़ गई है। हैरानी की बात है कि इन छात्रों को स्नातक के सेकंड ईयर के परीक्षा रिजल्ट में प्रैक्टिकल में अनुपस्थित बताया गया था। इसके बाद छात्रों ने कॉलेज  प्रशासन और विश्वविद्यालय को आवेदन देकर सुधार की गुहार लगाई थी, लेकिन कुछ फायदा नहीं हुआ, जबकि सभी पीड़ित छात्र जमुई के केकेएम कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग के हैं।
जमुई के केकेएम कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग के उन 32 छात्रों की परेशानी बढ़ गई है, जो स्नातक में उत्तीर्ण होने के बाद भी उनका रिजल्ट पेंडिंग है। मनोविज्ञान संकाय के 32  छात्र थर्ड ईयर की परीक्षा तो पास कर गए, लेकिन उन्हें सेकंड ईयर की परीक्षा में प्रैक्टिकल में अनुपस्थित बताया गया था, उसमें अब तक सुधार नहीं हो सका है, जबकि ये सभी  छात्र प्रैक्टिकल में उपस्थित थे। मनोविज्ञान के ये छात्र परेशान है कि इनका नामांकन अब एमए में कैसे होगा। इसके अलावा जिन छात्रों को दूसरे कार्यों में लगना था उन्हें भी  परेशानी हो रही है। 
छात्र सुधांशु कुमार पांडे के अनुसार उसका सिलेक्शन एक प्रतियोगी परीक्षा के बाद नियुक्ति के लिए हो चुका है, जिसमें उसने अपना मैक्सिमम क्वालिफिकेशन ग्रेजुएशन बताया है। अब कुछ दिनों में मुझे ट्रेनिंग के लिए कागजात को जमा जमा करने हैं, लेकिन रिजल्ट पेंडिंग में होने के कारण परेशानी बढ़ गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन की गलती के कारण  मेरा सेकंड पार्ट का प्रैक्टिकल का अंक अभी तक नहीं चढ़ा, जबकि शिवानी कुमारी और किशन कुमार का कहना है कि स्नातक का रिजल्ट जारी हो गया है, लेकिन पार्ट टू के  प्रैक्टिकल में अनुपस्थित बताया गया था, उसमें सुधार नहीं हुआ। अब एमए में कैसे नामांकन होगा। 
कॉलेज में मनोविज्ञान पढ़ाने वाले शिक्षक रणविजय सिंह ने बताया कि प्रैक्टिकल  के अंक विश्वविद्यालय को तीन अलग-अलग सीट में भेजे गए थे और फिर जब रिजल्ट में अनुपस्थित बताया गया तो दोबारा भेजा गया, लेकिन सुधार नहीं हुआ। कॉलेज के प्राचार्य  डॉक्टर जगरूप प्रसाद ने बताया कि मनोविज्ञान के 32 छात्रों को सेकंड ईयर में प्रैक्टिकल परीक्षा में अनुपस्थित बताया गया था, जबकि सभी छात्र उपस्थित थे और उनके अंक विश्वविद्यालय को भेजे गए थे, अभी तक परिणाम में सुधार नहीं हुआ है। हम इस बात की जानकारी विश्वविद्यालय को दे चुके हैं, लेकिन फिर भी छात्रों का रिजल्ट पेंडिंग होना समझ से परे है। 

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