अयोध्या फैसले को चुनौती दोहरा मानदंड : श्रीश्री रविशंकर

Ravishankar
कोलकाता
अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के पुनर्विचार याचिका दायर करने के फैसले को  आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने 'दोहरा मानदंड' करार दिया। उन्होंने कहा कि हिंदुओं और मुसलमानों को आगे बढ़ना चाहिए और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम  करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित मध्यस्थता समिति के सदस्य रहे आध्यात्मिक गुरु ने कहा कि मामला काफी पहले सुलझा लिया गया होता, अगर एक पक्ष विवादित जगह  पर मस्जिद बनाने पर न अड़ा रहता। भारत में मौजूदा आर्थिक संकट के संदर्भ में उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए काफी कुछ किए जाने की जरूरत है। बता दें  कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि देश के 99 फीसदी मुसलमान चाहते हैं कि इस निर्णय पर पुनर्विचार की याचिका दाखिल की जाए। उन्होंने आगे कहा कि   हिंदुओं और मुस्लिमों को अब आगे बढ़ना चाहिए और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए काम करना चाहिए। आपको बता दें कि अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा  बनाए गए मध्यस्थता पैनल में भी श्रीश्री रविशंकर शामलि रहे हैं। श्री श्री रविशंकर ने कहा कि अगर एक पक्ष विवादित स्थल पर मस्जिद बनाने को लेकर नहीं अड़ता तो इस विवाद   का हल काफी पहले ही निकल गया होता।

मस्जिद की जिद ना होती तो कब का सुलझ जाता अयोध्या विवाद
अयोध्या केस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए श्री श्री रविशंकर ने कहा कि हां, मैं अयोध्या केस पर आए फैसले से खुश हूं। मैं 2003 से ही कह रहा हूं कि दोनों  समुदाय इसका हल निकाल सकते हैं। एक तरफ मंदिर बनाएं और दूसरी तरफ मस्जिद लेकिन यह जिद कि मस्जिद वहीं बनाना है, का कोई मतलब नहीं था। श्रीश्री रविशंकर ने  सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लंबे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझाने के लिए बेहद अच्छा निर्णय बताया। सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने 9 नवंबर को एकमत से अयोध्या में  विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करते हुए केंद्र को निर्देश दिया था कि वह सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिये पांच एकड़ का भूखंड आवंटित करे। इस  फैसले को लेकर एआईएमपीएलबी द्वारा पुनर्विचार याचिका दायर करने की योजना के बारे में पूछे जाने पर श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि किसी भी फैसले से सभी लोग खुश नहीं हो सकते।

फैसले से हर किसी को खुश नहीं किया जा सकता
उन्होंने कहा कि स्वाभाविक है, हर किसी को एक फैसले से खुश नहीं किया जा सकता, अलग- अलग लोगों की अलग राय होती है। जो लोग फैसले पर पुनर्विचार याचिका के लिए  योजना बना रहे हैं, वही लोग पहले कह रहे थे कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार करेंगे, उन्होंने अपना मन बदल लिया। जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने पिछले हफ्ते कहा कि हाल  के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका का मसौदा तैयार है और याचिका 3 या 4 दिसंबर को दायर की जाएगी। एआईएमपीएलबी ने भी कहा है कि पुनर्विचार याचिका 9 दिसंबर से  पहले दायर की जाएगी।

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