यह आत्मघाती नादानी है

हमारे यहां तिल का ताड़ बनाने की परंपरा पुरानी है। नागरिकता कानून के बाद जिस तरह की हिंसा हो रही है और उसका दायरा बढ़ता जा रहा है, कुछ वैसी ही प्रवृत्ति का द्योतक  है। छात्र होने का मतलब यह नहीं कि आप किसी भी बात पर उस तरह व्यवहार करें, जैसे भेड़ों के झुंड में दिखता है कि एक भेड़ आगे गई तो बाकी सब उसके पीछे हो लेते हैं।  इससे आपका ही नुकसान है। किसी भी मुद्दे पर अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए तमाम ऐसे शांतिप्रिय मार्ग बापू के इस देश में हैं, जिनका अवलंब कर अपनी बात कहीं ज्यादा  प्रभावी ढंग से कही जा सकती है। तो फिर हिंसा का अवलंब करने की क्या जरूरत है? और वह भी इतना उग्र कि उससे निपटने के लिए पुलिस प्रशासन को नाकों चने चबाने पड़े  और वह भी एक ऐसे मुद्दे पर, जिसमें साफ-साफ कहा गया है कि इससे देश के किसी भी नागरिक का चाहे वह देश के किसी भी कोने में रहता हो कोई नुकसान नहीं है। छात्र का  पहला काम पढ़ना है। किसी बात को सुनकर करने से पहले यह सच जानना चाहिए कि उसमें कोई तथ्य है या अनायास ही बावले की तरह लोग हरकत करने लगते हैं। अब कहा जा  रहा है कि उसमें छात्रों ने नहीं असामाजिक तत्वों ने अपनी रोटी सेंकी। तो भाई जब आपने ऐसा करने का मौका दिया, तभी तो वे उसका फायदा उठा पाए और यदि आग लगाओगे तो  हाथ जलेंगे ये सनातन सत्य है। तो आग लगाने ही क्यों गए? देश का पूरा निजाम आपसे शांति की, संयम की अपील कर रहा है। आपसे पहले मामले को समझने की गुजारिश कर   रहा है और आप है कि आंदोलन पर निकल पड़े। क्यों आंदोलन कर रहे है यह पता करने की कोशिश नहीं की, कूद पड़े। जिसका परिणाम अनायास अशांति, सार्वजनिक संपत्ति का  नुकसान के रूप में सामने है। जब बात हद से आगे बढ़ेगी, तो पुलिस को भी सक्रिय होना पड़ेगा। तो उसका शिकार आप भी होंगे, तो फिर यह जो कुछ भी नया हंगामा हो रहा है या  हुआ है किसी भी तरह सही नहीं है। सर्वथा अनुचित और निंदनीय है। कम से कम अब ऐसे लोगों को सद्बुद्धि आनी चाहिए। कारण ऐसे कृत्यों से सिर्फ देश की छवि खराब होती है  और कुछ नहीं हासिल होता। यदि इसमें विपक्ष लिप्त है, जैसा कि सत्ताधारी पक्ष आरोप लगा रहा है, तो वह भी निंदनीय है। कारण राजनीति के अपने मापदंड है, तौर तरीके है। इस  तरह उपद्रव कर के राजनीति में कुछ भी हासिल किया जा सकता है ऐसा नहीं है। जो भी कोई इसमें आग में घी डालने का काम कर रहा है, चाहे वह राजनैतिक दल हो या कोई  और व्यक्ति या संस्था, वह छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न करें और अनायास ही देश के किसी भी राज्य का माहौल खराब न करें। नागरिकता कानून धर्म के नाम पर उन पीड़ित- प्रताड़ितों को मानवता हेतु सहारा देने के लिए है, जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान तथा Žबांग्लादेश  में सुकून से नहीं रह पा रहे हैं। कोई कम बुद्धि ही इसमें कोई दूसरा हेतु देखता है,  तो उसकी बुद्धि पर सिर्फ तरस खाया जा सकता है। फिर भी केंद्र सरकार इस पर किसी की भी, कोई भी आशंका दूर करने को तैयार है और लगातार ऐसा किया जा रहा है। इसलिए  जो यह आत्मघाती खेल चल रहा है, इस पर इसके सभी किरदारों को तुरंत विराम लगाना चाहिए। ऐसे उस हर क्षेत्र में शांति की बयार बहनी चाहिए, जहां उपद्रव हो रहा है। साथ ही  उन लोगों पर ढूंढ-ढूंढ कर कार्रवाई होनी चाहिए, जो आग में घी डालने का काम कर रहे हैं।

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