कुछ राज्यों ने खपत बढ़ाने के लिए राजकोषीय घाटा बढ़ाकर चार प्रतिशत करने का दिया सुझाव

नई दिल्ली
 कुछ राज्यों ने बुधवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतामरण से खपत बढ़ाने के लिए राजकोषीय घाटे को सीमित करने के लक्ष्य में ढील देने और उसे सकल घरेलू उत्पाद का 4 प्रतिशत के स्तर तक जाने देने को कहा। अर्थव्यवस्था में सुस्ती के साथ राजस्व संग्रह में नरमी को देखते हुए राज्यों ने यह सुझाव दिया है। वित्त मंत्री ने जुलाई में अपने बजट भाषण में  2019-20 के लिए राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को 3.4 प्रतिशत से घटाकर 3.3 प्रतिशत कर दिया। राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार चालू वित्त वर्ष के लिए  बजट में की गई घोषणा के अनुसार कर्ज योजना पर कायम है। यह स्थिति तब है जब सरकार ने कंपनी कर में कटौती की है। कंपनी कर में कटौती के कारण सरकार केराजस्व पर  1.45 लाख करोड़ रुपए का असर पड़ेगा। केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ बजट-पूर्व विचार विमर्श के दौरान कुछ राज्यों ने अर्थव्यवस्था में सुस्ती दूर करने के लिए खपत बढ़ाने को लेकर  राजकोषीय घाटे का दायरा बढ़ाने की वकालत की। केरल के वित्त मंत्री थॉमस इसाक ने बजट-पूर्व बैठक के बाद ट्विटर पर लिखा, वित्त मंत्री के साथ बजट- पूर्व चर्चा के दौरान  बिहार और केरल ने राजकोषीय घाटा सीमा बढ़ाकर 4 प्रतिशत करने का सुझाव दिया। इस पर कई राज्यों ने सहमति जताई। चालू वर्ष में राज्यों का वास्तविक व्यय कम होगा।  नरमी के समय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर यह नतीजा आ रहा है। कुछ विशेषज्ञ पहले ही यह अनुमान जता चुके हैं कि राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष में बढ़कर जीडीपी के 3.6 से  3.8 प्रतिशत तक जा सकता है। इसका कारण कमजोर आर्थिक वृद्धि और कंपनी कर में उल्लेखनीय कटौती के कारण राजस्व संग्रह में नरमी है।  
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