एक अभिनंदनीय बदलाव

एक जमाने में अपनी कारगुजारियों से देश भर में कुख्यात हरियाणा की खाप पंचायतें, जिनके रुढ़िवादी विचारों ने एक जमानें में प्यार को पाप बना दिया था और कई जोड़े उसके  शिकार हुए थे। अब अपनी पुरातनपंथी सोच में बदलाव लाते दिख रहे हैं। एक खाप का यह फैसला कि अब वे अंतरजातीय विवाह को मानेंगे और नाम के आगे जाति की बजाय गांव  का नाम जोड़ेंगे। इनकी दकियानूसी सोच के चलते अपना जीवन गंवा चुके जोड़ों की आत्मा को शांति प्रदान करेगा और भावी पीढ़ी को राहत की सांस देगा। कोई भी व्यवस्था देश और  काल के अनुरूप बदलती रहती है और यही सही है। कुछ चीजें जो आज से सौ-दो सौ साल पहले बहुत जरूरी थी, आज कालबाह्य हो चुकी है। उसी तरह समाज व्यवस्था की भी बात   है। कुछ बातें चिरंतन होती हैं। कुछ समय रहते अपनी उपयोगिता खो देती हैं। उन्हें जबर्दस्ती जिंदा रखना सिर्फ और सिर्फ उत्पीड़न का कारक बनती हैं और  यही खाप कर रही थी।   उम्मीद है कि एक खाप की यह शुरुआत अन्यों के लिए प्रेरणादायी बनेगी और जहां कहीं अभी भी ऐसी नकारात्मक मान्यताएं हावी है तिमिर तिरोहित होगी। भगवान ने सभी  व्यक्तियों को एक सरीखा बनाया है। चाहे वह किसी भी वर्ण या जीत का हो सबके खून का रंग लाल है, सबको मारने पर चोट लगती है, दुखी होने पर दु:ख और सुख होने पर खुशी  की अनुभूति होती है, तो फिर भेदभाव क्यों? हां, समाज के सही संचालन के लिए कुछ नियम कायदे जरूरी हैं। लेकिन वे समाज के ही भावी-पीढ़ी का गला न घोटने लगे इसका ध्यान  रखा जाना चाहिए और खाप में इस सोच की शुरुआत हो रही है, तो यह अभिनंदनीय है।

जल्द हो न्याय

मारे यहां मुकदमों के निपटारे में बहुत देर लगती है और किसी किसी मामले में तो पीढ़ियां बीत जाती हैं, तब फैसला आता है। इसके पीछे बुनियादी सुविधाओं का अभाव एक बड़ा  कारण है, जिसका लगातार विस्तार हो रहा है। परंतु उसमें कई ऐसे भी कारण है, जिन पर यदि समय रहते ध्यान दिया जाए तो इस  प्रक्रिया में काफी तेजी आ सकती है। मसलन   जांच प्रकिया तेज हो, सुनवाई जल्दी हो और ऊपर से नीचे तक न्यायाधिश पदों पर नियुक्तियां जल्दी हों, जो वर्षानुवर्षा रिक्त रहती है। जिससे वादी प्रतिवादी में हताशा बढ़ती है और  पूरी प्रक्रिया में लेट-लतीफी का तमगा लग जाता है। कहा गया है कि देर से होने वाला न्याय भी अन्याय के समान होता है। इस अवस्था में लोग इससे दूर भागते हैं और अपनी  समस्या के निदान के लिए संविधानेतर मार्ग का अवलंब करते हैं। जो प्रकारांतर से और तमाम तरह की सामाजिक समस्याओं को जन्म देता है। इसलिए पूरी प्रक्रिया को इस तरह गतिमान करने की जरूरत है कि लोगों को न्याय सही और समय से मिले। सौभाग्य से हमारी केंद्र सरकार और कानून मंत्री इन बातों को लेकर काफी संवेदनशील हैं और वैसे तमाम  कदम उठा रहे हैं, जिससे न्याय प्रक्रिया में तेजी आए, विलंब न हो। इसके लिए वे अखिल भारतीय न्याय सेवा भी शुरू करने की पहल कर चुके हैं। साथ ही तमाम ऐसे कदम उठाए  जा रहे हैं कि ऐसे मामलों के निपटारे की प्रक्रिया जल्द हो और लोंगो को अनंतकाल तक इंतजार न करना पड़े।

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