कैंसर से जंग जीतने के बाद बंगाल की श्यामली ने जीता सिल्वर

Shyamali Singh
कोलकाता
लंबी दूरी के धावकों को कई बाधाओं को तोड़ना होता है और पश्चिम बंगाल के मिदनापुर की श्यामली सिंह ने ऐसी ही कई चुनौतियों से पार पाते हुए टाटा स्टील कोलकाता 25के  (25 किमी) दौड़ में रविवार को भारतीय महिला खिलाड़ियों के बीच रजत पदक हासिल किया। बेहद ही गरीब किसान परिवार से संबंध रखने वाली श्यामली को दो साल पहले ट्यूमर  (कैंसर) का पता चला, लेकिन इसने भी उनके हौसलों को पस्त नहीं होने दिया। अपने पति सह कोच संतोष की मदद से उन्होंने 2017 में मुंबई मैराथन में भाग लिया और तीन घंटे  आठ मिनट 41 सेकेंड के समय के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। इससे उन्हें पुरस्कार राशि के तौर पर चार लाख रुपए मिले, जिसका इस्तेमाल उन्होंने अपने इलाज के लिए किया। दो  साल के बाद कैंसर पर जीत दर्ज कर उन्होंने दमदार वापसी की और कोलकाता 25के में महिला वर्ग में किरनजीत कौर के बाद दूसरे स्थान (एक घंटा 39 मिनट और दो सेकेंड) पर  रही। अपने संघर्ष को याद करते हुए श्यामली ने कहा कि हमारी स्थिति अच्छी नहीं थी। मेरे पति संतोष मेरे कोच भी हैं। हमें इलाज के लिए पैसे की जरूरत थी, इसलिए हमने  मिलकर संघर्ष करने का फैसला किया। मैंने मुंबई मैराथन में भाग लिया। मैं इसमें शीर्ष तीन में रहने को लेकर प्रतिबद्ध थी जिससे इलाज के लिए पैसे मिल सके। रविवार को वह  17 किलोमीटर तक भारतीय महिला धावकों में शीर्ष पर थी, लेकिन पेट की मांसपेशियों में खिंचाव आने के कारण उन्हें अपनी गति धीमी करनी पड़ी। इस दौरान उनके शरीर में पानी  की कमी हो गयी। उन्होंने कहा कि मुझे चिकित्सक से सलाह लेनी होगी, लेकिन मैं पांच हजार, 10 हजार मीटर के साथ 25के, हाफ और फुल मैराथन में दौड़ना जारी रखूंगी।
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