धोखाधड़ी है किसानों की कर्जमाफी का निर्णय : पाटिल

मुंबई
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने किसानों की कर्जमाफी का जो निर्णय लिया है, वह एक धोखाधड़ी है और मुख्यमंत्री उद्घव ठाकरे को राकांपा और कांग्रेस फंसा रही है। कांग्रेस नेताओं के चीनी कारखानों पर जो 200 करोड़ रुपए का कर्ज है, उसे बचाने के लिए यह कर्जमाफी की गई है। उन्होंने सवाल किया कि यह  संपूर्ण कर्जमाफी है तो मापदंड क्यों बनाए गए? उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने लगभग कर्ज माफ कर दिया था, ऐसे में यह संपूर्ण कर्जमाफी नहीं है। पाटिल ने कहा कि नागपुर अधिवेशन के दौरान हमने किसानों की कर्जमाफी की मांग की थी। राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्यपाल ने जो घोषणा की थी, उसी तरह की यह योजना है। इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं  की गई है। इस मांग को नजरअदांज करने के लिए कर्जमाफी घोषित की गई। उद्घव ठाकरे ने कहा था कि सात बारा कोरा कर उन्हें किसानों के आंसू पोछने हैं, उन्हें हमने यही बात  याद दिलाई। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि कर्जमाफी के लिए मापदंड तय किए गए हैं। संपूर्ण कर्जमाफी के लिए मापदंड क्यों तय किए गए? मापदंड बनाना आवश्यक है, लेकिन हमने  लगाए तो गलत और वे लगाकर रहे है सही। उन्होंने कहा कि 2001 से 2016 तक डेढ़ लाख रुपए तक की संपूर्ण कर्जमाफी हो चुकी है। जो कर्जमाफी से वंचित रह गए हैं, उसकी   वजह तकनीकी कारण हैं।

दो लाख से अधिक का कर्ज माफ नहीं
कर्जमाफी के संबंध में जारी जीआर के अनुसार महाराष्ट्र में जिन किसानों का फसल कर्ज दो लाख रुपए से अधिक है, वे कर्ज माफी योजना के पात्र नहीं होंगे। उद्घव ठाकरे के नेतृत्व  वाली महा विकास अघाड़ी सरकार ने गत सप्ताह कर्ज माफी योजना की घोषणा की थी। जीआर में कहा गया है कि महात्मा ज्योतिराव फुले किसान कर्ज माफी योजना के अनुसार  एक अप्रैल 2015 और 31 मार्च 2019 के बीच लिया गया दो लाख रुपए तक का कर्ज और जिसे 30 सितंबर 2019 तक चुकाया न गया हो, वह माफ कर दिया जाएगा। जीआर में  कहा गया है कि जिन किसानों का फसल कर्ज और पुनर्गठन कर्ज दो लाख रुपए से अधिक है, वे योजना के तहत किसी तरह के लाभ के पात्र नहीं हैं। वित्त एवं सहयोग विभाग की  एक समिति इस पर फैसला लेगी कि क्या किसानों की गैर निष्पादित संपत्तियों को कर्ज माफी योजना में राष्ट्रीयकृत, निजी और ग्रामीण बैंकों में शामिल किया जाए या नहीं। जीआर  में कहा गया है कि राष्ट्रीयकृत, जिला, सहकारी बैंकों और सहकारी समितियों से लिए गए कर्ज को माफ करने पर विचार किया जाएगा। जो लोग गैर कृषि क्षेत्र से हुई आय, पेंशन  पर कर देते हैं और जिनकी मासिक आय 25,000 रुपए से अधिक है, उन्हें भी यह लाभ नहीं मिलेगा। इधर किसान नेता अजित नवले ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा  जारी किया सरकारी प्रस्ताव कृषक समुदाय के साथ विश्वासघात है। उन्होंने कहा कि अधिकांश किसानों को इस योजना का फायदा नहीं मिलेगा, क्योंकि उनका बकाया कर्ज दो लाख रुपए से अधिक का है।
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