फिल्म पानीपत के रीलिज का रास्ता साफ

मुंबई
फिल्म निर्माता आशुतोष गोवारिकर की बहुचर्चित फिल्म पानीपत के प्रदर्शन का रास्ता साफ हो गया है। मंगलवार को बांबे हाईकोर्ट ने इस फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने से इंकार  कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐतिहासिक घटनाओं पर कोई कॉपीराइट के अधिकार का दावा नहीं कर सकता है। पूर्व आईएएस अधिकारी व चर्चित मराठी लेखक विश्वास पाटील  ने फिल्म को लेकर हाईकोर्ट में दावा दायर किया है, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें कोई अंतरिम राहत नहीं दी है। न्यायमूर्ति एससी गुप्ते के सामने मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान  पाटील के वकील ने दावा किया कि फिल्म पानीपत उनके मुवक्किल की एक किताब पर आधारित है। फिल्म की कहानी उनकी किताब से चुराई गई है। फिल्म का ट्रेलर देखने के बाद  मुझे इस बात का आभास हुआ है कि फिल्म की संकल्पना उनकी पानीपत को लेकर लिखी गई किताब पर आधारित है। इसलिए प्रदर्शन से पहले फिल्म उन्हें दिखाई जाए। इसके बाद  फिल्म के प्रदर्शन को अनुमति प्रदान की जाए। ब्योंकि यह कापीराइट से जुड़े नियमों का उल्लंघन है।
पाटील के दावे पर गौर करने के बाद न्यायमूर्ति ने कहा कि ऐतिहासिक घटनाओं व संदर्भो को लेकर कापीराइट का अधिकार नहीं किया जा सकता है। चूंकि फिल्म का प्रदर्शन छह  दिसंबर को प्रस्तावित है। इसलिए फिलहाल हम फिल्म के प्रदर्शन पर रोक नहीं लगा सकते है। न्यायमूर्ति ने कहा कि फिल्म में मराठा योद्धाओं को एक सदंर्भ मे दिखाया गया है, जो  एक आइडिया के रूप में उभर कर सामने आता है। इस मामले में हमे कॉपीराइट के उल्लंघन की कोई बात नजर नहीं आती है। इस तरह से न्यायमूर्ति ने पाटील को किसी प्रकार की  अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया। न्यायमूर्ति ने इस मामले की सुनवाई आठ सप्ताह के बाद रखी है और फिल्म निर्माता को मामले में पाटील के दावे पर हलफनामा दायर करने  को कहा है। पानीपत फिल्म में फिल्म अभिनेता अर्जुन कपूर व संजय दत्त ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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