भ्रष्टाचार की जड़ों पर प्रहार

वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी और वन रैंक वन पेंशन के बाद एक देश-एक राशन कार्ड की परिकल्पना को साकार कर केंद्र सरकार देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी  पीडीएस को नया रूप देने के साथ ही एक तरह से देश को आर्थिक रूप से एक सूत्र में पिरोने का काम कर  रही है। इस योजना के तहत लाभार्थी एक ही राशन कार्ड से राष्ट्रीय  खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत किसी भी उचित दर की दुकान से अपने कोटे का अनाज ले सकेंगे। एक जनवरी 2020 से केंद्र सरकार ने देश के 12 प्रांतों में एक देश-एक राशन   कार्ड योजना शुरू कर दी है। इस योजना को देश भर में लागू करने के लिए पहले 1 जून 2020 की समय सीमा तय की गई थी, लेकिन  अब इसे 15 जनवरी 2020 से लागू करने  की तैयारी है। 30 जून तक सभी राज्यों को इससे जोड़ने का लक्ष्य है। इससे न सिर्फ कोटेदारों की मनमानी रुकेगी, बल्कि उनके भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा। इसका सबसे अधिक  फायदा एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने वाले गरीबों विशेषकर प्रवासी मजदूरों को मिलेगा। पीडीएस पर गठित वाधवा समिति की रिपोर्ट में बताया था कि उचित दर की दुकान ही  भ्रष्टाचार का केंद्र हैं। यहां जनता को ठगने के लिए दुकान मालिक, ट्रांसपोर्टर, नौकरशाह और नेताओं में साठगांठ है। इसी साठगांठ के चलते खाद्यान्न की कालाबाजारी होती है और  योजना का लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल पाता। इसी को देखते हुए मोदी सरकार ने 2014 से ही राशन कार्डों का डिजिटलाईजेशन शुरू किया और अब तक यह किया जा चुका है। इतना ही नहीं 90 प्रतिशत राशन कार्ड आधार नंबर से जोड़े जा चुके है। इसमें 2.98 करोड़ राशन कार्ड फर्जी पाए गए, जिन्हें रद कर दिया गया। राष्ट्रीय स्तर पर राशन कार्ड  पोर्टेबिलिटी लक्ष्य हासिल करने के लिए यह जरूरी था कि विभिन्न राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में जारी होने वाले राशन कार्ड एक मानक प्रारूप में हों। इसी को देखते हुए राष्ट्रीय  खाद्य सुरक्षा कानून के तहत राशन कार्ड जारी करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मानक प्रारूप जारी किया गया। जिन प्रांतों में उचित दर की दुकानें शत प्रतिशत ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक  प्वाइंट ऑफ सेल डिवाइस से युक्त हो चुकी हैं वहां पीडीएस लाभार्थी अब किसी भी प्रदेश में निवास करते हुए अपने मौजूदा राशन कार्ड से ही अपने हिस्से का अनाज प्राप्त कर रहे  हैं। जल्द ही देश की सभी ऐसी दुकानों को प्वाइंट ऑफ सेल डिवाइस से जोड़ दिया जाएगा। पीडीएस के लाभार्थी खाद्यान्न से वंचित न रह जाएं, इसके लिए राशन डीलरों को हाइब्रिड  मॉडल की प्वाइंट ऑफ सेल मशीनें दी जा रही हैं। ये मशीनें ऑनलाइन मोड के साथ ही ऑफलाइन भी काम करेंगी। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत 75 फीसदी ग्रामीण आबादी और 50 फीसदी शहरी आबादी को केंद्र सरकार रियायती दर पर खाद्यान्न मुहैया करा रही है। इसके लिए देश में 23.18 करोड़ राशन कार्ड जारी किए गए हैं। कुल  संख्या को देखें तो केंद्र सरकार देश में 81 करोड़ से अधिक लोगों को सस्ते दाम पर खाद्यान्न मुहैया कराती है। इसके लिए 2019- 20 में 184000 करोड़ रुपए की खाद्यान्न  सŽिसडी का अनुमान लगाया गया था। 2018-19 की आर्थिक समीक्षा में तेजी से बढ़ती खाद्य सŽिसडी का हल ढूंढ़ने की जरूरत पर बल दिया गया था। इतनी भारी-भरकम धनराशि  खर्च करने के बावजूद देश में यदा-कदा भुखमरी की खबरें आती रहती हैं, तो इसका कारण है कि खाद्यान्न का वितरण जिस पीडीएस के माध्यम से होता है वह भ्रष्टाचार का पर्याय  बन चुकी है। पीडीएस में सुधार पर गठित वाधवा समिति ने यह पाया था कि 42 फीसदी अनाज राशन की दुकानों से निकल कर कालाबाजारी के लिए पहुंच जाता है। पूर्वोत्तर प्रांतों  में तो 97 फीसदी अनाज बाजार में पहुंच जाता है। इसके बावजूद तमिलनाडु, केरल, आंध्र, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में पीडीएस अच्छी तरह चल रही है। पीडीएस सुधार के लिए छत्तीसगढ़ में पीडीएस की सफलता रोल मॉडल बन सकती है। 2004 तक छत्तीसगढ़ में पीडीएस की कहानी उत्तर भारत के किसी भी राज्य से अलग नहीं थी, लेकिन राज्य सरकार  द्वारा तीन स्तरों पर किए गए उपायों ने तस्वीर ही बदल दी। सबसे पहले सरकार ने अति गरीबों और आदिवासियों को घर के नजदीक अनाज मुहैया कराने के लिए उचित दर की  दुकानों के लाइसेंस निजी व्यापारियों के बजाय स्थानीय समुदाय को सौंप दिए। इसका लाभ यह हुआ कि स्थानीय लोगों की भागीदारी से दुकानें पूरे दिन खुलने लगीं और गांव वाले  अपनी सुविधानुसार राशन लेने लगे। दूसरा सुधार राशन की दुकानों की संख्या बढ़ाकर किया गया। हर ग्राम पंचायत में कम से कम एक दुकान खोली गई। इससे राशन लेने की लंबी  कतारों में कमी आई और कम समय में ही राशन मिलने लगा। तीसरा सुधार दुकानों तक अनाज पहुंचाने में किया गया। इसके तहत हर महीने की छह तारीख तक पीले रंग के  विशेष ट्रकों में पूरी सामग्री सीधे दुकानों तक पहुंचाई जाने लगी। सरकार ने दुकानदारों का कमीशन भी बढ़ा दिया, जिससे उनका घाटा कम हुआ और उन्होंने अनाज को बाजार में  बेचना कम किया। फर्जी राशन कार्डों से छुटकारा पाने के लिए सरकार ने पुराने राशन कार्डों को खत्म कर नए प्रकार के कार्ड जारी किए। इन कदमों से पीडीएस की लागत भले बढ़ी,  लेकिन अनाज की कालाबाजारी रुकी और गरीबों के मुंह में निवाला पहुंचने लगा। सरकार भ्रष्टाचार की जड़ पर हमला करने के लिए प्रत्येक स्तर पर तकनीक रूपी चौकीदार बैठा रही  है। पिछले पांच वर्षों में सरकार राशन कार्ड, रसोई गैस, छात्रवृत्ति और वृद्धावस्था पेंशन जैसी योजनाओं से जुड़े छह करोड़ से अधिक फर्जी लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें योजना से  बाहर कर चुकी है। इससे सरकारी खजाने में 90,000 करोड़ रुपए की बचत हो रही है। एक देश-एक राशन कार्ड योजना भी भ्रष्टाचार मिटाने और वास्तविक लाभार्थियों तक खाद्यान्न  पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगी।

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