आईईए ने की भारत की गैस मूल्य निर्धारण नीति की आलोचना

IEA
नई दिल्ली
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने प्राकृतिक गैस के मूल्य निर्धारण की भारत की नीति की आलोचना की है। एजेंसी का कहना है कि घरेलू उत्पादन को वैश्विक स्तर के बेहद
निम्न संदर्भ मूल्य से जोड़ने से उत्पादकों को मिल रहा प्रोत्साहन कम हुआ है। एजेंसी ने भारत की ऊर्जा नीति की पहली गहन समीक्षा में कहा कि गैस का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए इस बात की जरूरत है इन्हें जीएसटी के तहत कराधान में अन्य ईंधनों के साथ प्रतिस्पर्धा के समान अवसर मिलें। हालांकि ऊर्जा बॉस्केट में गैस की हिस्सेदारी मौजूदा छह प्रतिशत से  बढ़ाकर 2030 तक 15 प्रतिशत करने की दिशा में एक प्रमुख चुनौती गैस का मूल्य निर्धारण है। उसने कहा, गैस की घरेलू कीमतों को अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ दर के न्नि स्तर से जोड़ने से  आपूर्ति बढ़ाने के लिए घरेलू उत्पादकों को मिल रहा प्रोत्साहन कम हुआ है। नरेंद्र मोदी सरकार ने 2014 में सरकार में आने के बाद घरेलू स्तर पर उत्पादित गैस के मूल्य निर्धारण  के लिए एक ऐसे तरीके को मंजूरी दी जो अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और रूस जैसे गैस निर्यातक देशों की औसत कीमत पर आधारित है। इस तरीके से गैस की मौजूदा कीमत 3.23  डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट है। यह तरलीकृत प्राकृतिक गैस के आयात के लिए भारत द्वारा किए जाने वाले भुगतान का आधा है। एजेंसी ने कहा कि भारत की 2014  की गैस मूल्य निर्धारण नीति देश में घरेलू आपूर्ति-मांग प्रदर्शित करने वाली बाजार आधारित प्रणाली पर ध्यान देने के बजाय कीमतों के स्तर को कम करने पर जोर देती है। उसने कहा कि भारत में अभी तक कोई व्यापार केंद्र नहीं है, जबकि 2019 में ही इसके सृजन का सुझाव दिया गया था। एजेंसी ने कहा कि गैस के व्यापार केंद्र के सृजन से खुले बाजार में  खरीदारों व विक्रेताओं के आपसी व्यवहार पर आधारित पारदर्शी कीमत का रास्ता तैयार होगा।
Labels:

Post a comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget