उद्धव के ऐलान से रविवार से अनिश्चितकाल के लिए शिर्डी बंद

मुंबई
साईं बाबा की जन्मभूमि को लेकर शुरू हुआ विवाद गहराता जा रहा है। मराठवाड़ा स्थित पाथरी के विकास के लिए 100 करोड़ का ऐलान करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव   ठाकरे ने पाथरी को साईं की जन्मभूमि कह दिया। बस यहीं से विवाद शुरू हो गया। महाराष्ट्र सरकार द्वारा पाथरी को तीर्थस्थान के तौर पर विकसित करने के फैसले के बाद भाजपा   सांसद सुजय विखे पाटिल ने शुक्रवार को कानूनी लड़ाई की चेतावनी दी है। वहीं, इस विवाद के चलते पहली बार शिर्डी साईं ट्रस्ट ने मंदिर रविवार से अनिश्चित काल के लिए बंद   करने का निर्णय लिया है। अहमदनगर सीट से सांसद पाटिल ने सवाल उठाते हुए कहा कि साईंबाबा की जन्मभूमि को लेकर दावा तभी क्यों सामने आया, जब राज्य में नई सरकार   का गठन हुआ है। उन्होंने कहा कि साईंबाबा के जन्मस्थान को लेकर आजतक कोई मतभेद ही नहीं था। अचानक से पाथरी को लेकर ऐसे दावे कहां से सामने आ गए। अगर राजनीतिक हस्तक्षेप जारी रहा तो शिर्डी के लोग इस मसले पर कानूनी लड़ाई शुरू कर सकते हैं।

अशोक चव्हाण ने फैसले का किया बचाव
वहीं पूर्व सीएम तथा कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण ने उद्धव सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि पाथरी में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विरोध जन्मभूमि विवाद की  वजह से नहीं होना चाहिए। अहमदनगर के शिर्डी में हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
वहीं एनसीपी नेता दुर्रानी अब्दुल्लाह खान ने भी दावा करते हुए कहा कि इस बात को साबित करने के पर्याप्त सबूत हैं कि साईंबाबा का जन्म पाथरी में हुआ था। शिर्डी जहां साईंबाबा   की कर्मभूमि थी, तो वहीं पाथरी जन्मभूमि। दोनों ही जगहों का अपना महत्व है। पाथरी में पर्यटक आते हैं, लेकिन यहां सुविधाओं का अभाव है। शिर्डी के लोगों को फंड से दिक्कत  नहीं है। वे तो बस यह नहीं चाहते कि पाथरी को साईंबाबा की जन्मभूमि कहा जाए, क्योंकि ऐसा हो गया तो पर्यटकों की संख्या वहां कम हो जाएगी।

शिर्डी-पाथरी: क्या है इस विवाद की जड़?
इस विवाद की शुरुआत तब हुई, जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण के दौरान साईं की जन्मभूमि का नाम पाथरी बताया जो शिर्डी से करीब 275 किलोमीटर की  दूरी पर स्थित है। परभणी जिले में स्थित पाथरी के विकास के लिए 100 करोड़ का ऐलान करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने पाथरी को साईं की जन्मभूमि कह दिया। शिर्डी गांव के  निवासी और शिर्डी साईं ट्रस्ट के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री के इस बयान का विरोध कर रहे हैं। इनका कहना है कि वह पाथरी के विकास के लिए 100 करोड़ देने का विरोध नहीं कर रहे   हैं, लेकिन पाथरी को साईं की जन्मभूमि कहकर उसका विकास करना उचित नहीं है। साईं की जाति क्या थी और साईं का जन्म कहां हुआ था, इसका उल्लेख कहीं नहीं किया गया है  क्योंकि बाबा ने इस बारे में किसी को कुछ नहीं बताया। साईं तो बस कहीं से शिर्डी में आकर बस गए और यहीं के होकर रह गए। साईं के जन्मस्थान को लेकर विवाद इतना बढ़   गया है कि पहली बार शिर्डी साईं ट्रस्ट ने मंदिर रविवार से अनिश्चित काल के लिए बंद करने का निर्णय लिया है। मंदिर बंद करने से पहले शनिवार को एक सभा का आयोजन  भी  किया जाएगा। ट्रस्ट के एक सदस्य बाबूसाहेब वाकछोरे कहते हैं कि शिर्डी स्थिति साईं मंदिर 19 जनवरी से अनिश्चितकाल के लिए बंद रहेगा।
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