गोगाबिल झील को बतौर पर्यटन स्थल विकसित करने पर मछुआरों का विरोध

कटिहार
 मनिहारी अनुमंडल स्थित गोगाबिल झील को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की चर्चा के बीच अब वर्षों से पुश्तैनी पेशा के रूप में मछली मारने से जुड़े हजारों मछुआरों के सामने  जगार  संकट आ खड़ा हुआ है। मछुआरे यह कहते हुए इस पर विरोध कर रहे हैं कि 87 एकड़ के इस जल भाग में पिछले 20 वर्षों से विदेशी पक्षी आते ही नहीं हैं, मगर कुछ जमींदार अपने निजी लाभ  के लिए मनिहारी गोगाबिल झील के नाम पर सरकार को गुमराह कर रहे हैं। इसलिए हमारे रोजगार को संकट में डाल कर इस इलाके को पर्यटन के रूप में विकसित करने का कोई औचित्य ही  नहीं है। इस पर मछुआरा संघ के ग्रुप लीडर जनार्दन मंडल कहते हैं कि वो लोग सोसाइटी के माध्यम से सरकार को राजस्व देकर पुश्तैनी रूप से इस 87 एकड़ जल भाग में मछली मारते आए  हैं। इस झील से जुड़ कर रोजाना 5 से 10 हजार मछुवारों का रोजगार जुड़ा हुआ है। यहां सरकारी आदेश से मछली मरना बंद हो जाने से दियारा इलाके से एक बड़ा रोजगार खत्म हो जाएगा।  मछुआरों के नेता काचू महलदार कहते हैं कि स्थानीय कुछ जमींदार सरकार को साइबेरियन पक्षी आने का झांसा देकर गोगाबिल झील से जुड़े अपने आस-पास की जमीन की कीमत बढ़ाना चाहते  हैं। जहां तक विदेशी पक्षी का सवाल है तो वे लगभग 20 सालों से गोगाबिल झील में आ ही नहीं रहे हैं। मगर सरकार फिर भी स्थल जांच के बगैर ही उनलोगों की बात पर गुमराह हो कर इस  10 हजार मछुआरों के रोजगार को संकट में डाल रही है। इस मामले में जिला उप विकास आयुक्त वर्षा सिंह कहती हैं कि जल्द गोगाबिल झील इलाके में मछली मरने वालों को मछली मरने से  रोक कर इस इलाके को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कवायद शुरू की जाएगी।
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