डंके की चोट पर कह रहा हूं , वापस नही होगा सीएए

Amit Shah
लखनऊ
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थन में मंगलवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखऊ में एक जनसभा की। यहां पर उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत 'भारत माता की जय' के नारों से करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा), कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी (बसपा), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को नागरिकता कानून को लेकर हो रही  हिंसा का जिम्मेदार ठहराया। अमित शाह बोले, ''मैं आज डंके की चोट पर कहने आया हूं कि जिसको विरोध करना है करे, सीएए वापस नहीं होने वाला है।''
अमित शाह ने आगे कहा कि नेहरू जी ने कहा था कि केंद्रीय राहत कोष का उपयोग शरणार्थियों को राहत देने के लिए करना चाहिए। इनको नागरिकता देने के लिए जो जरूरी हो वो   करना चाहिए, लेकिन कांग्रेस ने कुछ नहीं किया। महात्मा गांधी का हवाला देते हुए गृहमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी जी ने 1947 में कहा था कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू, सिख  भारत आ सकते हैं। उन्हें नागरिकता देना, गौरव देना, भारत सरकार का कर्तव्य होना चाहिए। अमित शाह ने कहा कि मैं वोट बैंक के लोभी नेताओं को कहना चाहता हूं, आप इनके  कैंप में जाइए, कल तक जो 100-100 हेक्टेयर के मालिक थे वे आज एक छोटी सी झोपड़ी में परिवार के साथ भीख मांगकर गुजारा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने वर्षों से प्रताड़ित लोगों को उनके जीवन का नया अध्याय शुरू करने का मौका दिया है।
अमित शाह ने कहा कि नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रचार किया जा रहा है कि इसकी वजह से इस देश के मुसलमानों की नागरिकता चली जाएगी। ममता दीदी, राहुल  बाबा, अखिलेश यादव चर्चा करने के लिए सार्वजनिक मंच तलाश लो, हमारा स्वतंत्र देव चर्चा करने के लिए तैयार है। सीएए की कोई भी धारा, मुसलमान छोड़ दीजिए, अल्पसंक्यक  छोड़ दीजिए किसी भी व्यक्ति की नागरिकता ले सकती है, तो वह मुझे दिखा दीजिए।

सपा-बसपा- कांग्रेस, टीएमसी पर वार
गृहमंत्री ने कहा कि देश में भ्रम फैलाया जा रहा है, दंगे कराए जा रहे हैं, आगजनी फैलाई जा रही है, यह धरना प्रदर्शन, यह विरोध, यह भ्रांति एसपी-बीएसपी, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस  फैला रही है। इसमें किसी की नागरिकता छीनने का कोई प्रावधान नहीं है। इस बिल के अंदर नागरिकता देने का प्रावधान है। अमित शाह ने कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश,  अफगानिस्तान जहां भारत के विभाजन के बाद करोड़ों हिंदू वहां रह गए, सिख वहां रह गए, ईसाई, जैन, बौध, पारसी वहां रह गए। मैंने उनके दर्द को सुना है। महात्मा गांधी की  जयंती के दिन एक हजार माताओं-बहनों से बलात्कार किया जाता है, उनको जबरन निकाह पढ़ाया जाता है। हजारों की संख्या में मंदिर-गुरुद्वारे तोड़े जाते हैं। अफगानिस्तान के अंदर  आसमान को छूने वाले पुतले को तोप के गोले से जीर्णशीर्ण कर दिया गया।

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