पर्यावरण में बदलाव पर विचार आवश्यक : आदित्य ठाकरे

ठाणे
शहरों और गांवों के विकास में सामाजिक और स्वास्थ्य पर विचार करते हुए दिर्घकालीन नियोजन होना चाहिए। साथ ही इसे कठोरता से लागू करते समय पर्यावरण में बदलाव पर  विचार करना आवश्यक है। ईज ऑफ डुईंग बिजनेस की तरह इज ऑफ लिविंग का भी नियोजन होना जरूरी है। बदल रहीं परिस्थितियों में पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के  लिए शहर में क्षेत्रिय नियोजन समय की जरूरत है। यह बातें- पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने कही। नवी मुंबई के वाशी स्थित सिडको भवन में राष्ट्रीय स्तर पर नगर नियोजन  विषयक संस्था द्वारा आयोजित 68वां राष्ट्रीय नगर और क्षेत्र नियोजन परिषद के उद्घाटन समारोह में ठाकरे बोल रहे थे। आदित्य ठाकरे के साथ मंच पर आईटीपीआई संस्था के  अध्यक्ष प्रा. मेश्राम, उपाध्यक्ष मिलिंद पाटिल, महासचिव प्रदीप कपुर, जितेंद्र भोपले आदि उपस्थित थे। इस दौरान उद्धव ठाकरे ने कहा कि नगर नियोजन मेरे मन में मौजूद आंतरिक  विषय है। नागरिकरण के आवाहन के साथ शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों का शाश्वत विकास भी महत्वपूर्ण है। नगररचना और नियोजन में महाराष्ट्र प्रवर्तक राज्य है। शहरों के विकास के  साथ ही पर्यावरण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसे लापरवाही से नहीं लिया जा सकता है। नियोजन में पर्यावरण के अनुकूल तथ्यों पर जोर देने की जरूरत है। आदित्य ठाकरे ने कहा  कि नागरिकों को शाश्वत विकास के साथ ही सभी मूलभूत सुविधाओं को भी मुहैया कराना सरकार का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि स्थानीय नागरिकों की जरूरतों को ध्यान में रखते  हुए नगर विकास का नियोजन करना चाहिए। इसमें सभी घटकों को उचित न्याय देना जरूरी है। आदित्य ठाकरे ने कहा कि अतीत से सबक लेकर भविष्य की योजना बनाते समय  विश्व स्तर पर शुरू घटनाओं का अभ्यास करना आवश्वयक है। इसके साथ ही काम को शुरू करते समय ग्लोबल और लोकल दोनों में मेल देखना जरूरी है। आज वातावरण में बदलाव अनेकों समस्याओंं का कारण बन गया है। इसका असर विश्व अनुभव कर रहा है। इससे लड़ने के लिए शाश्वत और नियोजनबद्ध विकास करना नितांत आवश्यक है।  विभिन्न उपाययोजनाओं के माध्यम से हम वातावरण के संतुलन को बनाए रखने में जुटे हुए हैं। घनकचरा प्रबंधन, परिवहन नियोजन, शहरी, वन और खेती जैसे प्रयोग किया गया  है। इसे लोगों का सकारात्मक और भारी प्रतिसाद मिल रहा है।
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